दशाश्वमेध घाट स्थित सिद्धपीठ श्रीबड़ी शीतला माता माई धाम में संगीत समारोह की चौथी निशा पर कला साधकों ने देवी गीतों के साथ नृत्यांजलि अर्पित कर मां की आराधना की। पं. दुर्गा प्रसन्ना ने शहनाई पर भैरवी में कवने गली बसेलू भवानी...धुन बजाकर भावाजंलि अर्पित की। वहीं, मंदिर में रातभर दर्शन-पूजन का क्रम चलता रहा।
शाम को माता शीतला के शृंगार व पूजन के बाद संगीत समारोह का शुभारंभ गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजकत्व में पं. दुर्गा प्रसन्ना की शहनाई से हुआ। उन्होंने पारंपरिक धुनों के साथ राग किरवानी में देवी की स्तुति की। विशाल कृष्णा ने मंच पर महिषासुर मर्दिनी पर आधारित जय जय जय जग जननी देवी... माता गीत पर भावमुद्राएं प्रस्तुत कीं। पारंपरिक कथक के बाद आज गोपाल बसे ब्रिज धाम... से ब्रजधाम को अवतरित किया। डॉ. विजय कपूर ने बिना जीवन सूना..., जाइब देवी के दुवरिया...आदि सुनाए। ओम तिवारी ने शीतल के शीतल चरणीया..., राजन तिवारी ने मां के दरबार में जाकर देखो..., श्रद्धा पांडेय ने मैया मोरी झुलेली झुलनवा..., राजेश तिवारी रत्न ने भक्ति मनवा में जगल रहे..., बड़ा नीक लागे हो सुहावन काशी नगरी..., अवधेश पाठक ने हर साल हर बेरी आइला दुवरिया माइ..., सरिता सेठ ने लगली लगनिया शीतला दुवरिया... आदि गीतों से वातावरण भक्तिमय कर दिया।
माता दरबार में 26 वर्षों से लगातार हाजिरी लगा रहे गोरखपुर के नंदू मिश्रा ने गणपति राखो मेरी लाज...से शुरुआत की। काशी वाली शीतला मां से प्यार हो गया सच्ची-मुच्ची..., माता वैष्णवी बसेली कश्मीरवा की काली कलकत्तवा ए हारी...समेत अनेक गीत सुनाए। उन्होंने संगीतमय हनुमान चालीसा भी सुनाई। तबले पर बलराम मिश्र, सुमंत सुधांशु राजपूत, ढोलक पर सनी विशाल, कीबोर्ड पर रामाश्रय, ऑक्टोपैड पर चंदन, बैंजो पर संजय, साइड रिदम पर धीरेंद्र ने संगत की। पं. मनीष पांडेय व पं. कमलेश पांडेय ने कलाकारों का चुनरी व प्रसाद देकर स्वागत किया।