Varanasi News: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मठों में कथा का भी आयोजन किया गया। सैकड़ों भक्तों ने श्रीकृष्ण की लीला सुन विभोर हो गए। भक्तों में प्रसाद का भी वितरण किया गया।
वाराणसी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम रही। वैष्णव संप्रदाय के लोगों ने अपने-अपने मठों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव का विहंगम आयोजन किया। सामनेघाट स्थित श्रीवैष्ण मठ और अस्सी स्थित रामानुज कोट परिसर में विधि-विधान से जन्माष्टमी आयोजन हुआ। इसके बाद भव्य भंडारे का भी आयोजन किया गया। मठों में जहां सोहर और हरेकृष्णा महामंत्र का जाप हो रहा था।
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अशोक की पत्तियों और करौंदे से कदंब की डाल सजी थी तो छोटे-छोटे खिलौने भी लड्डू गोपाल के स्वागत में सजाए गए थे। घड़ी की सुइयों ने जैसे 12 बजाए तो शंख ध्वनि, डमरू, घंटा और घड़ियाल की ध्वनि के बीच लड्डू गोपाल ने जन्म लिया। अभिषेक के बाद लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया गया।
श्रीवैष्ण मठ के पीठासीन जगद्गुरु संपतकुमाराचार्य ने कहा कि जन्माष्टमी का महापर्व अन्याय, अहंकार एवं अत्याचार को शमन करने का पर्व है। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के अवतार और उनके जीवन की महिमा को स्मरण कराती है।
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वहीं, त्रिदंडी स्वामी रामप्रपन्नाचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। उनके जन्म के बाद ही धरती के सारे कष्ट और पाप खत्म होते गए। रामप्रपन्नाचार्य ने प्रभु श्रीकृष्ण की भव्य आरती उतारी।