अधिवक्ता ने यह भी कहा कि यूपी जिला पंचायत नियमावली 1994 नियम 10(4) में तकनीकी आधार पर नामांकन निरस्त नहीं किया जा सकता। डीएम ने तकनीकी आधार पर नामांकन खारिज किया है जो अवैधानिक है। याचिका में यह जिक्र किया गया कि नोटरी अधिवक्ता ने नोटरी लाइसेंस समाप्त होने के तीन माह पूर्व नवीनीकरण शुल्क जमा करने के साथ जिला जज वाराणसी से अनुमोदित कराकर नवीनीकरण प्रार्थनापत्र दिया था और नोटरी अधिवक्ता का लाइसेंस निरस्त नहीं है बल्कि नवीनीकरण विचाराधीन है।
ऐसे में नामांकन खारिज किया जाना गलत है। अदालत से याचना की गई कि चंदा यादव के नामांकन खारिज का आदेश निरस्त हो। निर्वाचित अध्यक्ष पूनम मौर्य के चुनाव को निरस्त करने के साथ नए सिरे से वाराणसी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव कराया जाए। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि याचिका को ग्रायहता के बिंदु पर सुना गया। प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज हो और विपक्षी को नोटिस जारी हो और सुनवाई की अगली तारीख 6 अगस्त नियत की जाती है।