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जज्बे को सलाम: घुटने और कंधे की सर्जरी कराने वाले मरीजों ने लगाई दौड़, जीता पुरस्कार; BHU में हुई प्रतियोगिता

Fri, 16 Aug 2024 04:55 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में रन एंड प्ले विथ डिग्निटी के तहत आयोजित कार्यक्रम में 100 से ज्यादा मरीज ने भागीदारी की। कंधा उतरने वाले मरीजों को डॉर्ट फेकने की प्रतियोगिता एवं घुटने के लिगामेंट के मरीजों की दौड़ प्रतियोगिता हुई। 
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प्रतियोगिता में दौड़ लगाते मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में कंधे और घुटने में चोट की सर्जरी कराने वाले मरीजो ने ट्र\मा सेंटर परिसर में दौड़ लगाई। इस दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वालो को आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर एसएन संखवार ने पुरस्कृत किया।

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इंडियन आर्थोस्कोपी सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आईपीएस ओबेराय ने इस दौरान ट्रेनी डॉक्टर्स को दूरबीन विधि से कंधा उतरने के ऑपरेशन की बारीकियां बताई। जयप्रकाश नारायण ट्रॉमा सेंटर एम्स, नई दिल्ली से सीनियर फिजियोथिरेपिस्ट एएस मूर्ति ने इन मरीजों के ऑपरेशन के बाद रिहैबलिटेशन व फिजियोथिरेपी की जानकारी दी। 

हौसले को हर किसी ने सराहा
ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी प्रोफेसर सौरभ सिंह ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में मौजूदा स्थिति में स्पोर्टस इंजरी के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं। इन मरीजों का दूरबीन विधि से ऑपरेशन और उसके बाद  रिहैबलिटेशन के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से फिजियोथिरेपी भी की जा रही है। जिससे इन मरीजों के क्लीनिकल रिजल्ट में काफी सुधार हुआ है।



एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) की चोट बहुत आम है और आमतौर पर नीचे की ओर पूरा दबाव डालते समय पैर के मुड़ जाने के कारण ऐसा होता है। बताया कि पूर्ववर्ती क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) घुटने के मध्य में स्थित एक लिगामेंट है, जो पिंडली की हड्डी (टिबिया) को जांघ की हड्डी (फीमर) पर आगे बढ़ने से रोकता है।

प्रो. शिवम सिन्हा एवं डॉ. कुमार प्रशांत के समन्वय में हुए आयोजन में बीएचयू अस्पताल के डिप्टी एमएस प्रोफेसर अंकुर सिंह, राम सेंटर के डिप्टी एमएस प्रोफेसर राजेश मीना, डॉ. राकेश विश्वकर्मा, डॉ. सुष्मित वर्मा, डॉ. समय जायसवाल, डॉ. गौतम त्रिपाठी, डॉ. पंकज मौर्या के साथ ही रेडियोलॉजी विभाग से प्रो. इशान कुमार एवं डॉ. प्रमोद सिंह, डॉक्टर आकांक्षा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में भूमिका निभाई।
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दो खिलाड़ियों की भी ट्रामा सेंटर में हुई सर्जरी
प्रोफेसर सौरभ सिंह ने बताया कि दो खिलाड़ियों की भी सर्जरी ट्रामा सेंटर में की गई है। इसमें रणजी खेलने  वाले एक क्रिकेटर एवं राज्य स्तरीय कबड्डी खिलाड़ी का  दूरबीन विधि द्वारा एसीएल का सफल ऑपरेशन एवं रिहैबलिटेशन हुआ है, जिससे वे दोनों खिलाड़ी अब खेल के मैदान में वापसी कर चुके हैं। 

बार-बार कंधा उतरना तब होता है जब ऊपरी बांह की हड्डी (ह्यूमरस) का गेंद के आकार का अगला भाग कंधे के ब्लेड (स्कैपुला) में अपने गोलाकार सॉकेट से बाहर निकल जाता है। जब कंधा डिस्लोकेट हो जाता है  तो इसे आमतौर पर जोड़ से बलपूर्वक आगे की ओर धकेला जाता है। 



कंधा विकृत दिख सकता है और आमतौर पर बहुत दर्द होता है। ट्रॉमा सेंटर में बार-बार कंधा उतरने का मरीजों का सफल इलाज कई वर्षों से किया जा रहा है। मरीजों के अनुसार उनका दोबारा से कभी कंधा उतरने की घटना नहीं देखी गई व साथ ही साथ वे लोग अपनी दैनिक दिनचर्या को वापस शुरू कर दिये हैं।
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