अमेरिका और उसकी एजेंसियों को पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि बांग्लादेश में 16 प्रतिशत हिंदू कैसे घटकर साढ़े सात प्रतिशत और पाकिस्तान में आठ प्रतिशत से घटकर हिंदू एक प्रतिशत से कम कैसे हो गए। फिजी में कर्नल राबुका के तख्तापलट के बाद हिंदुओं पर जो अत्याचार हुए, उसका कहीं नामोनिशान नहीं है।
रिपोर्ट में भारत में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हिंसा के झूठे आरोप लगाए गए हैं, जबकि यही तथ्य छुपा लिया गया है कि भारत में अल्पसंख्यक संविधान के तहत बहुसंख्यकों से अधिक अधिकार पाते हैं। अखिल भारतीय संत समिति अमेरिकी एजेंसियों को चेतावनी देती है कि वह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता पर प्रश्नचिह्न लगाने का अपना यह दुस्साहस बंद करे। नौ और 10 दिसंबर को शीर्ष संतों की राष्ट्रीय बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा कर अपनी रणनीति तय करेंगे।