काशी विश्वनाथ धाम में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव
- फोटो : अमर उजाला
सदगुरु जग्गी वासुदेव ने नदेसर स्थित एक होटल में आत्मज्ञान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आदियोगी शिव की नगरी काशी के कण कण में महादेव स्वयं विराजते हैं। वैदिक इतिहास शिव और शिवत्व की महिमा से भरे हुए हैं। ज्ञानवापी में मूल रूप से विराट शिव मंदिर ही विराजमान था। हमारे हजारों वर्ष पुरातन वैदिक इतिहास ज्ञानवापी के शिव मंदिर के अवर्णनीय वैभव से सज्जित है।
वर्तमान में जरूरत है वैदिक इतिहास के उन पन्नों को पलट कर देखने की। सारी शंकाएं स्वयं समाप्त हो जाएंगी। मैसूर से आई एक महिला अनुयायी के विश्वनाथ मंदिर में सफाई के सवाल के जवाब में जग्गी वासुदेव ने कहा कि पहली बार वर्ष 2012 में जब बनारस आया था। तब से लेकर 2022 के बनारस में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। पुरातन काशी का नूतन स्वरूप अत्यंत आकर्षक है। काशी की सकारात्मक ऊर्जा सदियों से होते आ रहे विभिन्न भौतिक परिवर्तनों से अछूती है।