स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
काशी के सभी समाज और सामाजिक संगठनों को कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि भारत के विश्व गुरु होने का कारण यहां की संस्कृति ही रही है। विश्वपटल पर सनातन के संदेश को पहुंचाने के लिए संस्कृति संसद एक बेहतर मंच होगा। आयोजन समिति के सचिव सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि आजकल के युवाओं को विभिन्न प्रकार से भ्रमित किया जा रहा है। युवाओं को संस्कृति संसद के माध्यम से धर्म की सही जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसलिए अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
महारुद्राभिषेक के साथ चार दिवसीय संस्कृति संसद की शुरुआत होगी। दो से पांच नवंबर तक अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्रीकाशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में गंगा महासभा की ओर से संस्कृति संसद का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन दो नवंबर को महारुद्राभिषेक, तीन नवंबर को धर्म विमर्श, चार नवंबर को मातृ विमर्श और पांच नवंबर को युवा विमर्श का आयोजन होगा।