वहीं कुछ बंदियों से भी पूछताछ की गई। कई बंदियों के परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद बैरकों में चिह्नित करते हुए बंदियों की बर्बरता से पिटाई की गई। घटना के बाद पीसीओ से भी बातचीत नहीं करने दिया गया। उधर, डीआईजी जेल एके सिंह और जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने अपनी अलग-अलग जांच बैठाई है।
मुख्यालय स्तर से भी इस पर जेल अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। धोखाधड़ी मुकदमे में आरोपी बंदी राजेश जायसवाल की तबीयत बिगड़ने से शुक्रवार सुबह मौत होने से क्षुब्ध बंदियों ने लापरवाही का आरोप लगाकर जेल में तोड़फोड़ की थी। तीन बंदी रक्षकों को भी बंधक बना लिया था।
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सीसी कैमरे के जरिए अन्य और आरोपियों की पहचान की जा रही है। कई इलेक्ट्रानिक उपकरण भी बवाल के भेंट चढ़ गए थे। जेल अधीक्षक एके सक्सेना के अनुसार अब स्थिति पूरे नियंत्रण में है। सीसी कैमरे के जरिए अन्य आरोपियों को भी चिह्नित किया जा रहा है।
घटना के बाद बवाल में चिह्नित बंदियों का बैरक बदल दिया गया। वहीं कुछ बंदियों की निगरानी भी कंट्रोल रूम से बढ़ा दी गई है। पश्चिम की जेलों से आए बंदियों की कड़ी निगरानी की जा रही है। जेल प्रशासन को आशंका है कि इन्हीं बंदियों ने जेल के माहौल को खराब किया। क्योंकि इनकी मनमानी पर लगाम लगाया था। हत्या, लूट और रंगदारी जैसे मुकदमों के कुछ बंदियों को दूसरे जेलों में भी भेजने की तैयारी चल रही है।
जेल में बंदियों की तोड़फोड़ में हुए नुकसान का जेल प्रशासन आंकलन कर रहा है। बैरकों के दरवाजे, प्रशासनिक कार्यालय, एंबुलेंस में आदि तोड़फोड़ की गई थी। अधिकारियों के अनुसार पांच लाख से अधिक की क्षति पहुंची है।