बाबा की शाही बारात, जगह-जगह उतारी गई आरती
- फोटो : अमर उजाला
कोविड नियमों को ध्यान में रखते हुए भक्तों को रथ पर चढ़कर बाबा की आरती व पूजन करने की अनुमति नहीं थी। रास्ते भर भक्तों ने अपने-अपने घरों, दरवाजों, चबूतरों से बाबा की आरती उतारी। छतों व बरामदों से महिलाएं पुष्पवर्षा कर बारात का अभिनंदन कर रही थीं। श्री लाट भैरव डमरू दल का 51 सदस्यीय समूह दीपक के नेतृत्व में डमरू नाद करते हुए बारात के साथ चल रहा था।
शिवम अग्रहरि ने बताया कि इस वर्ष हम सभी ने बाबा की आरती कर कोरोना महामारी का जड़ मूल से विनाश करने की कामना की। बरात अपने निर्धारित मार्ग विशेश्वरगंज, भैरवनाथ चौराहा, भैरवनाथ मंदिर, जतनबर, कतुआपुरा, अंबियामंडी, बलुआबीर, हनुमानफाटक, तेलियाना से होते हुए नउआपोखर स्थित लाट भैरव बाजार में जनवासे के लिए रुकते हुए जलालीपुरा मार्ग से कज्जाकपुरा स्थित मंदिर प्रांगण पहुंची। मंदिर परिसर सहित बरात के मार्गभर में सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी संख्या में पुलिस व पीएसी के जवानों तैनात रहे।
गोधूली बेला में बारात के मंदिर पहुंचते ही बाबा का द्वारपूजन किया गया। तदुपरांत रजत मुखौटे को मंदिर की पांच परिक्रमा करवाने के उपरांत विग्रह पर विराजमान कर वैवाहिक अनुष्ठान प्रारंभ कराए गए। रात्रि में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिपूर्वक समस्त वैवाहिक कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष हरिहर पांडेय ने आचार्य रविंद्र त्रिपाठी के आचार्यत्व में संपन्न कराया।
कपालभैरव मंदिर में देर रात्रि तक दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। राजसी ठाठ के साथ दूल्हे के रूप में सजे बाबा की मनमोहक छवि का दर्शन कर भक्त भी निहाल होते रहे। पूरे मंदिर प्रांगण को सजाया गया था। अष्ट भैरव सहित माता काली की भव्य झांकी सजाई गई थी। कपाल मोचन कुंड को रंग बिरंगे विद्युत झालरों और अत्याधुनिक फुहारों से सुसज्जित किया गया था। मध्यरात्रि में हजारा दीपक से बाबा की आरती उतारी गई।