यहां बता दें कि रोपवे परियोजना का डीपीआर तैयार होने के बाद कई प्रयास हुए मगर निविदा में कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई थी। इसके बाद नेशनल हाईवे अथारिटी से जुड़ी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी को परियोजना को क्रियान्वयन करने के लिए नामित किया गया है। एनएचएलएमएल की ओर से परियोजना के एलाइनमेंट का विस्तृत अध्ययन कर फिर फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर निविदा आमंत्रित की गई थी।
इसमें जिसमें पांच स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें पहला स्टेशन कैंट रेलवे स्टेशन, उसके बाद काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरिजाघर क्रॉसिंग, जो टर्निंग स्टेशन होगा। अंतिम स्टेशन गोदौलिया चौराहा प्रस्तावित किया गया है। वीडीए उपाध्यक्ष ईशा दुहन ने कहा कि निविदा खुल गई है और दो कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इनके बीच टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड पर इन्हें परखा जाएगा। ,
कैंट स्टेशन के बाहर मुख्य सचिव डा. दुर्गा शंकर मिश्रा समेत अन्य अधिकारी
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मुख्य सचिव डा. दुर्गा शंकर मिश्रा वाराणसी के दौर पर हैं। रोपवे निर्माण में कार्यदायी संस्था के चयन से पहले शनिवार को मुख्य सचिव डा. दुर्गा शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में परियोजना की बाधाओं व भविष्य पर विस्तृत चर्चा होगी। माना जा रहा है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में विभागों की जिम्मेदारी के साथ ही भूमि पूजन, परियोजना निर्माण की समयसीमा सहित अन्य प्रमुख बिंदुओं पर निर्णय भी होगा।
इससे पहले शुक्रवार शाम रोपवे परियोजना पर काशी विद्यापीठ की आपत्तियों पर मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कुलपति प्रो आनंद त्यागी से चर्चा की। कुलपति ने बताया कि विद्यापीठ परिसर में रोपवे के टावर बनने से कई भवन प्रभावित होंगे और विश्वविद्यालय के वातावरण पर भी प्रभाव पड़ेगा। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया इस मामले में आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।