गड्ढे में तब्दील बनारस की सड़कों का जून आएगा भी या नहीं, यह कहना मुश्किल है। खस्ताहाल हो चुकी सड़कों को बनाने की रफ्तार से लगता नहीं कि योगी सरकार के 15 जून तक सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने के आदेश पूरा हो पाएगा।
पीडब्ल्यूडी, नगर निगम ने सड़क निर्माण का काम शुरू तो कराया लेकिन केवल उन्हीं इलाकों में जहां वीवीआईपी का आना जाना है। शहर के सबसे व्यस्ततम मार्ग कैंट से लंका और लहुराबीर से गिरजाघर, मैदागिन से गोदौलिया आदि सड़कों की बारी अब तक नहीं आई है।
इन मार्गों को जल्द नहीं बनाया गया तो बारिश के समय यहां की हालत और खराब हो जाएगी। जिन इलाकों में आईपीडीएस के तहत भूमिगत केबलिंग का काम चल रहा है। वहां की सड़कें भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं। गोदौलिया से मैदागिन मार्ग पर भी आईपीडीएस के लिए बड़े-बडे् गड्ढे खोदे गए हैं।
जिन्हें भरकर बारिश से पहले सड़क दुरुस्त कराना जरूरी है। यहां तीर्थयात्रियों का आना जाना लगा रहता है। सबसे अधिक यातायात का दबाव कैंट-लंका मार्ग पर है। यहां दुर्गाकुंड, संकटमोचन, सिगरा, रथयात्रा, कमच्छा आदि मार्गों पर गडढे हैं। जिन्हें अभी भरना बाकी है।
लहुराबीर से गिरजाघर मार्ग पर भी चेतगंज, नई सड़क, बेनियाबाग के पास सड़कें पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं। पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के पास सड़कों की मरम्मत के लिए मात्र 28 दिन बचे हैं। जिले में पीडब्ल्यूडी की 2342 किलोमीटर सड़कें हैं।
इनमें 1400 किमी सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। जिले में पीडब्ल्यूडी की सड़कों का बड़ा हिस्सा 1653 किलोमीटर ग्रामीण क्षेत्र में है, जबकि 689 किलोमीटर सड़क शहरी क्षेत्र में है। 1121 किमी नगर निगम की सड़कें हैं। अब तक वीवीआईपी वाले इलाके सर्किट हाउस, कमिश्नरी, डीएम कार्यालय, डीएम आवास के आसपास की सड़कों चमकाया गया है।
इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता ने कहा कि एके सिंह भदौरिया ने कहा कि जिन सड़कों पर विकास कार्यों के लिए खुदाई चल रही है, वहां अभी काम पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है। काम पूरा होते ही ऐसी सड़कें दुरुस्त करा दी जाएंगी। शासन से 46 लाख रुपये मिले हैं। अभी और धनराशि आनी बाकी है।