रामनगर से पड़ाव तक बनने वाली आठ किलोमीटर लंबी सड़क के लिए तीन गांवों में करीब 100 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इसके अलावा गंगा के समानांतर सड़क निर्माण के लिए सरकारी जमीन का उपयोग किया जाएगा। सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब अधिग्रहण वाले गांवों में किसानों के साथ खुली बैठकें 15 अप्रैल के बाद से शुरू होंगी।
उधर, प्रशासन की ओर से पर्यावरण मंत्रालय, वन मंत्रालय और नमामि गंगे से अनापत्ति के आवेदन कर दिया गया है। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन की मंत्रालयों के अधिकारियों के बीच संवाद शुरू हो गया है। परियोजना को शुरू करने से पहले स्थानीय स्तर पर भी एनओसी के लिए प्रक्रिया शुरू करा दी गई है।
इस पूरी कवायद के साथ ही रजिस्ट्री पर रोक वाले गांवों में जमीनों की मांग बढ़ने लगी है। स्थानीय डेवलपर प्रशासन की मंशा समझ कर उसमें अपनी योजना बनाने में जुटे हैं। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि रामनगर से पड़ाव तक की सड़क के लिए जमीन का सर्वे पूरा हो गया है। मंत्रालयों से एनओसी के लिए आवेदन किया गया है और स्थानीय विभागों से अनापत्ति के लिए बैठक भी हुई है। डीपीआर और डिजाइन का काम अंतिम दौर में है।
करीब दो हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के डीपीआर के साथ ही डिजाइन भी तैयार कराई जा रही है। डीपीआर और डिजाइन को शासन में संस्तुति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसकी निविदा प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी। उम्मीद है कि अप्रैल तक इसकी निविदा जारी कर जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इस परियोजना का शिलान्यास कराया जाएगा।