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उगते सूरज से सुख की अरज

Thu, 19 Nov 2015 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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पूरब के आसमान में लालिमा निकलने का व्रतियों ने बुधवार की सुबह गंगा जल में खड़े होकर बेसब्री से घंटों इंतजार किया।
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घाटों की सीढ़ियों पर बनी बेदियों पर दीपों की मालाएं सजाकर व्रती महिलाएं षष्ठी माता की महिमा के गीतों में डूबी रहीं तो ढोल-नगाड़ों के साथ आतिशबाजी भी होती रही।
 सूर्योपासना के दूसरे और आखिरी अर्घ्य के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। आसमान साफ होने के बाद सूरज की लाली नजर आते ही जयकारों के साथ अर्घ्य अर्पित करने के लिए हजारों हाथ उठ गए।
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व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। इसी के साथ डाला षष्ठी के लोकोत्सव की छटा लोगों की स्मृतियों में वर्ष भर के लिए रच बस गई।
उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए डाला में घी की बाती से जलते दीये सजाकर व्रती महिलाएं तड़के ही घाटों, सरोवरों की ओर निकल पड़ीं। उग हो सुरुज देव अरघ दियाउ... जैसे अरज भरे गीत गूंजने लगे।
बाजे-गाजे के साथ व्रतियों, उनके परिवारीजनों और पड़ोसियों का रेला जब उमड़ा तो आस्था का मेला खुशियों के हिचकोले भरने लगा।
शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते समय जितनी भीड़ थी, उससे ज्यादा लोग भोर में पहुंचे। चार बजे तक दशाश्वमेध घाट पर पैर रखने की जगह नहीं बची।
सीढ़ियों, मढ़ियों से फर्श तक सिर्फ हल्दी-चंदन से लेपी गईं वेदियों पर गन्ने के मंडप सजे दिखे और व्रती महिलाएं स्तुति में लीन नजर आईं।
शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, राणा महल घाट, पांडेय घाट, केदार घाट से अस्सी और नगवा घाट होते हुए विश्वसुंदरी पुल तक गंगा किनारे उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा।
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पतियों, पुत्रों ने व्रतियों को अर्घ्य दिलाया। राजघाट, प्रह्लाद घाट, पंचगंगा, शास्त्री घाट और सूर्य सरोवर पर रेला उमड़ा। व्रती महिलाओं ने अर्घ्य देकर पुत्र प्राप्ति, अखंड सुहाग, सुख-समृद्धि की कामना की।
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