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शिक्षा का अधिकार : पात्रों का हक डकार गए अपात्र

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नकली आय प्रमाणपत्र, आधार बनवाकर अपात्र बच्चों का प्रवेश कराया जा रहा है। इस मामले को लेकर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की है। जिले में पिछले दिनों एक केस भी सामने आया है, जिसमें बीएसए के हस्ताक्षर के बिना अभिभावक बच्चे के प्रवेश के लिए स्कू ल पहुंच गए थे। इस पत्र को जब स्कूल ने शिक्षा विभाग के अधिकारी को भेजा तो खुलासा हुआ। पिछले साल भी कई अभिभावकों ने बीएसए के फर्जी हस्ताक्षर को दिखाकर प्रवेश करा लिया था। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बच्चे का प्रवेश निरस्त कर दिया था। फिलहाल आरटीई के तहत तीसरे चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
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केस वन
गिलट बाजार निवासी सुनील अपनी बेटी के लिए पिछले दो साल से प्रयासरत हैं, 2020 में उन्हें सीट फुल होने की बात कहकर स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया। इस साल भी प्रथम चरण की शुरुआत में आवेदन किया था, लेकिन आवेदन निरस्त हो गया।
केस दो
महेशपुर निवासी भरत प्रकाश ने बेटे के लिए साल 2019 में आवेदन किया था, आवेदन पत्र में गलतियां बताकर उसे निरस्त कर दिया गया। इस साल भी स्कूलों के जो विकल्प भरे थे, उनमें भी सीट फुल होने के कारण बेटे का दूसरी बार भी प्रवेश नहीं हो सका।
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कोट
कई अभिभावक ऐसी धांधली कर रहे हैं। पिछले साल भी कुछ ऐसे मामले आए थे। जिसमें बीएसए के फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर बच्चों का प्रवेश स्कूल में करा लिया था। ऐसे अभिभावकों पर कार्रवाई की जाएगी, साथ ही सत्यापन में भी सख्ती बरती जाएगी। - विमल केशरी, जिला समन्वयक
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