बीएचयू में सेामवार को उड़िया भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हो गया। कवि सम्राट उपेंद्र भंज ओड़िया चेयर की ओर से ‘ओड़िया भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान का पुनः अन्वेषण’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में ओडिशा के साहित्यकार डॉ. हृषिकेश पांडा ने कहा कि ओडिशा में सामाजिक और राजनीतिक इतिहास के साथ ही समुद्री परंपराओं, ऐतिहासिक विदेशी संबंधों, मंदिर स्थापत्य, बौद्ध प्रभाव और श्रीलंका के साथ सांस्कृतिक संबंधों पर काफी रिसर्च और काम हुआ है।
प्रो. यशोधरा मिश्रा ने स्थानीय देवियों से संबंधित अनुष्ठानिक कथाएं, उनकी सामाजिक और भाषाई विशेषता और परंपराओं के बारे में बताया। कहा कि ये सर्जक और संरक्षक के रूप में महिलाओं की भूमिका को बड़ा बनाती है। कार्यक्रम के गोलमेज सम्मेलन में ओड़िया भाषा और संस्कृति से जुड़ी प्रमुख चिंताओं पर सामूहिक विमर्श चला। चर्चा में भाषाई पहचान, भाषा के क्षरण, शैक्षिक अंतराल, सामाजिक प्रभाव और बहुभाषिक परतों के सह-अस्तित्व जैसे मुद्दों को रखा गया। भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिंदु कुमार तिवारी ने मेहमानों और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया।