अस्पतालों में बनता है अलग डेंगू वार्ड
डेंगू मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में अलग वार्ड बनाया जाता है। स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देश पर मंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल में आठ से दस बेड का वार्ड बनाकर मरीजों का इलाज किया जाता है। इसमें हर बेड पर मच्छरदानी, इलाज की मुकम्मल व्यवस्था रहती है।
नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग की खास भूमिका
डेंगू पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की खास भूमिका होती है। हर साल नगर निगम की ओर से टीम बनाकर दवा का छिड़काव कराने के साथ ही मलिन बस्तियों में साफ-सफाई भी कराई जाती है। उधर स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर परीक्षण शिविर लगाकर लोगों की जांच कराई जाती है।
तेजी से कम होने लगता है प्लेटलेट्स
डेंगू के मरीजों के इलाज में सबसे अहम भूमिका प्लेटलेट्स की होती है। बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगता है। बीएचयू ब्लड बैंक के सीएमओ डॉ. एसके सिंह के मुताबिक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या डेढ़ लाख से चार लाख होनी चाहिए। डेढ़ लाख से कम होने पर वायरल फीवर, मलेरिया, टाइफाइड के अलावा डेंगू होने की आशंका बढ़ जाती है। बताया कि 50 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर चिकित्सक की सलाह अनिवार्य हो जाती है।
एक नजर में डेंगू मरीजों आंकड़ा
वर्ष और संख्या
2020-11
2019-522
2018-327
2017-650
(बीएचयू और दीनदयाल अस्पताल में जांच के बाद पुष्टि की रिपोर्ट)