विशेषज्ञों के अनुसार काशी विद्यापीठ और आराजीलाइन ब्लॉक में भूजल का स्तर गिरने से असि नदी का प्रवाह टूटा और ये नदी से नाले में बदल गई। प्रयागराज से बहकर आने वाली इस नदी का प्रवाह पथ करीब 120 किलोमीटर चलने के बाद टूटा है। इन दोनों ब्लॉक में भूजल का स्तर 15 मीटर से भी नीचे चला गया है। भूजल का स्तर नीचे जाने से नदी की धारा दो जगह टूट गई है। असि नदी के प्रवाह में तीसरी रुकावट नेशनल हाईवे का विस्तार बना। 90 की दशक में जीटी रोड का विस्तार किया गया। इसमें नदी पथ का ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से नदी का बचा खुचा पथ भी टूट गया।