ज्ञानवापी स्थित अमीन सर्वे के मांग की अर्जी खारिज करने हुए अदालत ने कहा कि पहले ही अधिवक्ता आयुक्त सर्वे हो चुका है। राखी सिंह के वाद में सर्वे हुआ था। वादी चाहे तो उसकी सत्यापित प्रतिलिपि ले ले।
भगवान अविमुक्तेश्वर विराजमान के वाद में ज्ञानवापी स्थित आराजी नंबर 9130 के अमीन सर्वे की अर्जी खारिज कर दी गई। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) युगल शंभू की अदालत ने कहा कि आवेदन में अमीन से सर्वे का कारण नहीं बताया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 14 अक्तूबर को होगी।
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वाद विष्णु गुप्त और अजीत सिंह की तरफ से दाखिल किया गया था। वादी पक्ष की ओर से अदालत में अर्जी देकर मांग की गई थी कि ज्ञानवापी स्थित आराजी नंबर 9130 का अमीन सर्वे कराया जाए। वादी पक्ष के खर्चे पर ही अमीन से फोटोग्राफी भी कराई जाए।
इस पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति दाखिल की और आवेदन को भ्रामक बताते हुए खारिज करने का अनुरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनीं और सर्वे की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी।
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अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वादी पक्ष साक्ष्य एकत्र करना चाहता है, जो विधिक रूप से पोषणीय नहीं है। आराजी नंबर 9130 के संबंध में राखी सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी के मुकदमे में अधिवक्ता आयुक्त का सर्वे हो चुका है। वादी पक्ष अगर चाहे तो उस सर्वे की सत्यापित प्रतिलिपि लेकर अपने वाद में प्रस्तुत कर सकता है।