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Varanasi News: रोपवे स्टेशनों के लिए जल्द पूरी होगी जमीनों की रजिस्ट्री

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देश के पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे के लिए सभी जमीनों की रजिस्ट्री जून के अंत तक हो जाएगी। इनके कागजात तैयार कराए जा रहे हैं। रोपवे के लिए चिह्नित की गई ज्यादातर जमीनें सरकारी हैं। कुछ जमीनें निजी मिली हैं। इन पर लोग पहले से काबिज हैं। उन्हें मुआवजा देकर जमीन खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं रथयात्रा पर दस फीसदी जमीन ऐसी है जिस पर दो पक्ष स्वामित्व का दावा कर रहे हैं। इस विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी वीडीए एडीएम वित्त एवं राजस्व को दी है। रोपवे के लिए कुल पांच स्टेशन बनाए जाने हैं। पहले चरण में कैंट और काशी विद्यापीठ स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए कैंट स्टेशन और काशी विद्यापीठ परिसर में खोदाई का काम जारी है। अधिकारियों के अनुसार रथयात्रा पर दस फीसदी जमीन पर दो पक्ष स्वामित्व का दावा कर रहे हैं। इसमें एक पक्ष विद्या साही और दूसरा रुद्रा रियल एस्टेट कंपनी है। दोनों के बीच का वाद सुलझाने की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संजय कुमार को दी गई है। जमीन पर जिसका भी स्वामित्व होगा उसे मुआवजा देकर जमीन की रजिस्ट्री कराई जाएगी। हालांकि दोनों ही पक्ष विभाग को रोपवे के लिए जमीन देने को तैयार हैं। अन्य स्टेशनों की जमीन के कागजात तैयार हो रहे हैं। जून के अंत तक सभी रजिस्ट्री पूरी कर ली जाएगी।
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जाम से मिलेगी राहत
रोपवे निर्माण के बाद काशीवासियों व पर्यटकों को काफी हद तक जाम से राहत मिलेगी। रोपवे संचालन से कैंट स्टेशन व अन्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।शहर के प्रमुख मार्गाें से होकर गुजरने वाला रोपवे यात्रियों को कैंट स्टेशन से गोदौलिया कुछ ही मिनटों में पहुंचाएगा।

वर्जन
स्टेशन के लिए चिह्नित जमीनों के कागजात तैयार कराए जा रहे हैं। जहां विवाद है, उसे सुलझाने के बाद भूस्वामियों को मुआवजा देकर जमीन का बैनामा कराया जाएगा। जून के अंत तक सभी जमीनों के बैनामे पूरे हो जाएंगे। - अभिषेक गोयल, वीडीए, उपाध्यक्ष
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एक नजर आंकड़े
कुल जमीन
1.59 हेक्टेयर
निजी जमीन
0.96 हेक्टेयर

सरकारी जमीन
0.63 हेक्टेयर

-
निर्माण के लिए आवश्यक जमीन

एक टॉवर के लिए 36 वर्ग मीटर
बेसेंट थियोसॉफिकल सोसाइटी
4000 वर्ग मीटर

भारत माता मंदिर

3600 वर्ग मीटर

कैंट और गोदौलिया 3000 वर्ग मीटर
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