तीन बजे दोबारा मंदिर के कपाट खुले तो दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। रात आठ बजे संध्या आरती हुई। श्रद्धालुओं में जहां भगवान के स्वस्थ होने की खुशी थी तो वहीं परवल के जूस का प्रसाद लेने की होड़ भी मची हुई थी। 15 दिन बाद मंदिर का पट खुलने से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मालूम हो कि पखवाड़े भर पहले श्रद्धालुओं द्वारा अधिक जलाभिषेक करने से भगवान जगन्नाथ बीमार हो गए थे। इसके चलते मंदिर का पट बंद हो गया था।