स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम शास्त्री
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम शास्त्री की अंतिम ख्वाहिश थी कि वह दोबारा जन्म लेकर देश से भ्रष्टाचार का खात्मा करें। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में अपनी अंतिम इच्छा जाहिर की थी। उनका कहना था कि यह जन्म तो मां भारती को स्वतंत्रता दिलाकर सफल हो गया। तब ऐसा जुनून था कि जान भी चली जाती तो कोई गम नहीं था। अब तो यह जीवन जी चुका हूं।
उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा था अब वे जीवन के अंतिम पड़ाव पर मां भारती से यही प्रार्थना करते हैं कि अगला जन्म भी भारत भूमि में ही मिले। कहा था कि वह पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं और अगले जन्म में भारत भूमि में जन्म लेकर भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए संघर्ष करेंगे। सीताराम शास्त्री स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ शिक्षक भी थे। इसलिए वे बार-बार शिक्षकों से राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभाने का आह्वान करते थे। उनकी इच्छा थी कि स्वतंत्र भारत का हर एक बच्चा शिक्षित होना चाहिए। उन्होंने अमर उजाला के सामाजिक मुद्दे उठाने और विभिन्न पक्षों को लेकर चलाए जा रहे अभियानों की खूब सराहना की थी।