अब तो नई पीढ़ी के मुनव्वर अली, अब्दुल सलीम, मो. कलीम, मो. शाहिद और मो. तौफीक इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हो चुके हैं। हाजी गयास का कहना है कि वे इसे दिलों को करीब लाने का जरिया भी मानते हैं। बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद बना रहे बस यही उनका मेहनताना है। कई पीढ़ियों से बाबा विश्वनाथ की दुआएं मिल रही हैं।
मुनव्वर अली ने बताया कि कागज की दफ्ती से ढांचा तैयार किया जाता है। इसको सूती कपड़े से मजबूत किया जाता है। इसके बाद रेशमी कपड़े से पगड़ी तैयार होती है। इसको ढेर सारे मोती और जरी से सजाया जाता है।