बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति, बोले राम सकोप तब भय बिनु होई न प्रीत। प्रभु श्रीराम को समुद्र की प्रार्थना करते हुए तीन दिन बीत गए। इसके बाद उन्होंने क्रोध में कहा कि भय के बिना प्रीति नहीं हो सकती है। राम ने अग्निबाण निकाला तो समुद्र तत्काल उनके सामने प्रकट होकर क्षमा मांगने लगा।
रामनगर की रामलीला में 20वें दिन बुधवार को श्रीराम का सेना सहित सिंधु तटप्रयाण, विभीषण मिलन, सेतु निर्माण एवं शिवस्थापना की लीला श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गई। समुद्र ने भगवान राम को बताया कि आपकी सेना में नल और नील नाम के बंदरों को बचपन में ही ऋषि का आशीर्वाद मिला है कि वह जिस पत्थर या पहाड़ को छू देंगे वह पानी में तैरने लगेंगे। आप सेतु का निर्माण कराइए।
जामवंत की सलाह पर सभी वानर, भालू, पहाड़ और पेड़ उखाड़ लाते हैं। सेतु का निर्माण शुरू हो जाता है। यह देखकर राम ने वहां पर रामेश्वर महादेव की स्थापना की। शिव स्थापना एवं पूजा करने के बाद वह कहते हैं कि शिव के समान हमें कोई प्यारा नहीं है। मेरे द्वारा स्थापित रामेश्वरम का दर्शन करेगा वह हमारे धाम को जाएगा और जो सेतु का दर्शन करेगा, वह भवसागर से पार उतर जाएगा। राम के प्रताप से पानी में पत्थर तैरने लगते हैं। आरती के बाद लीला को विराम दिया गया।