राक्षसाें का अत्याचार बढ़ने से संपूर्ण पृथ्वी त्राहिमाम त्राहिमाम... कर रही थी। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन दिया कि अयोध्यापुरी में रघुकुल में राम के रूप में प्रकट होकर राक्षसों का संहार करूंगा। इसके बाद भगवान ने वामन स्वरूप में दैत्यराज बलि की परीक्षा लेते हैं। तीन पग में वामन अवतार रूपी विष्णु तीनों लोकों को नाप लेते हैं।
शुक्रवार को धूपचंडी स्थित चित्रकूट भवन में वामनलीला के साथ ही रामलीला का भी श्रीगणेश हो गया। चित्रकूल रामलीला समिति की ओर से समुद्र मंथन और वामन लीला की गई। इसके बाद रामलीला के आरंभ की घोषणा हुई। समिति के अध्यक्ष सुबोध अग्रवाल ने वामन लीला का पौराणिक महत्व बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कोराना प्रोटोकॉल के तहत वामन लीला का मंचन किया गया। इसके बाद 30 सितंबर से रामलीला की शुरुआत होगी।
शिवपुर में मुकुट पूजन कर निभाई गई परंपरा
शिवपुर की प्राचीन रामलीला के आयोजन पर इस साल भी संशय बना हुआ है। शुक्रवार को भगवान के मुकुट पूजन के साथ परंपरा का निर्वहन हुआ। पांचों पांडव मंदिर में भगवान गणेश की पूजा के बाद रामायणी दल ने मानस के प्रसंगों का गायन किया। सिर्फ मुकुट पूजन होने से लीला प्रेमियों के मन में रामलीला के आयोजन पर संशय बना हुआ है। मुकुट पूजन के दौरान श्रवण कुमार सिंह, अनिल यादव, आभास शाह, मदन मोहन शर्मा, मुन्नू मिश्रा, कमलेश केसरी, अशोक मोदनवाल, दीनानाथ केशरी, संतोष मिश्रा, नवीन प्रधान, भोलनाथ शर्मा मौजूद रहे।