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रामनगर की रामलीला: अश्विन कृष्ण प्रतिपदा पर हुआ रामजन्म, चारों भाइयों के जन्म के साथ रामनगर में उतरा त्रेतायुग

Tue, 09 Sep 2025 06:04 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

भगवान राम के जन्म का मंचन देखने के लिए दूरदराज से लीला प्रेमी रामनगर आए हुए थे। जैसे ही उनका जन्म हुआ पूरा रामनगर प्रभु के जयकारे से गूंज उठा। सुरक्षा के लिए भारी व्यवस्थाएं की गई थीं।
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अश्विन कृष्ण प्रतिपदा पर हुआ रामजन्म। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Ramleela: अश्विन कृष्ण प्रतिपदा पर भगवान राम का जन्म हुआ। भगवान के जन्म के साथ ही रामनगर में त्रेतायुग जीवंत हो उठा। कलयुग में रामनगर की हर गली राममय हो उठी। सोमवार को रामनगर पूरी तरह अयोध्या बन गया था।

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सोमवार को विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के तीसरे दिन में रामजन्म की लीला हुई। पूरे अयोध्यावासी खुश थे। खुश क्यों न होते, जब सारे सुख के बावजूद अयोध्या के आंगन में बच्चों की किलकारी न गूंजने से दुखी राजा दशरथ को पुत्र रत्न की प्राप्ति जो हुई थी। उन्हें श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न जैसे पुत्र मिले। अयोध्या में बैंड बाजा, सोहर के स्वर गूंजे बधाई गीत गाए गए।

बालकांड के 187.7 से 205.1 तक के दोहों के सस्वर पाठ के दौरान श्री अवध में पुत्र प्राप्ति यज्ञ, अद्भुत झांकी, श्री राम आदि का जन्म, विराट दर्शन, बाल लीला, यज्ञोपवीत, मृगया आदि लीला हुई। लीला का आरंभ अयोध्या के राजा दशरथ के गुरु वशिष्ठ के पास जाने से हुई। राजन कहते हैं आपकी कृपा से हमें सबकुछ है परंतु पुत्र नहीं है। वशिष्ठ आश्वासन देते हैं कि पूर्व जन्म में तुम लोगों ने तपस्या कर भगवान को अपना पुत्र होने का वर मांगा था। मन धीरज रखो तुम्हें चार पुत्र प्राप्त होंगे।

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खूब लगे जयकारे

राजा दशरथ पुत्रेष्ठि यज्ञ करते हैं। रानियों को पुत्रों की प्राप्ति होती है। श्री राम उनसे कहते हैं कि तुम दोनों ने बहुत तपस्या की है तुमने हमसे पुत्र मांगा सो उसे सत्य करने तुम्हारे घर में प्रकट हुए हैं। तब कौशल्या उनसे यह रूप छोड़ बाललीला करने को कहती हैं। इतना कहते ही श्रीराम बालरूप धारण कर रोने लगते हैं। 

सारी अयोध्या में खुशी छा जाती है। राजा दशरथ ब्राह्मणों को दान देते हैं। अयोध्या दीपों से जगमग हो उठती है। सोहर और मंगलगीत गाए जाते हैं। राजा दशरथ के आग्रह पर गुरु वशिष्ठ चारों पुत्रों का नामकरण करते हैं। इसके बाद बाल रूपी श्रीराम द्वारा मृगया लीला संपन्न होती है। रामलीला को आरती कर विराम दिया जाता है।

कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला...
जाल्हूपुर की रामलीला में सोमवार को श्रीराम जन्म की लीला हुई। जन्म के बाद सूप में रखकर जैसे ही रामजन्म के लीला का मंचन किया गया, महिलाएं सोहर गाने लगीं। रामजन्म के समाचार से राजा दशरथ सहित संपूर्ण अयोध्या में खुशी छा जाती है। अवध में चारों ओर बधाई गीत गाए जाने लगे। 

कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला, अवध में जन्मे रघुराई, कौशल्या रानी दे दो बधाई। बाल स्वरूप भगवान राम से मिलने भगवान शंकर योगी का भेष बनाकर आते हैं और इसके बाद चारों भाइयों का नामकरण गुरु वशिष्ठ करते हैं। इसके बाद भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा दीक्षा के प्रस्थान करते हैं। 
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शिवपुर रामलीला में चारों भाइयों का हुआ नामकरण
शिवपुर रामलीला में सोमवार को भगवान श्रीराम के जन्म की लीला हुई। रामजन्म की लीला में श्रीराम के जन्म के साथ ही अयोध्या में हर्ष और उल्लास का वातावरण छा गया। लीला के अगले चरण में कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ ने प्रभु श्रीराम, भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार संपन्न कराया।
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