मणिककर्णिका की गलियों में गंगा का पानी।
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केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार चार दिनों के बाद गंगा के जलस्तर में गिरावट शुरू होगी। केंद्रीय जल आयोग की बाढ़ बुलेटिन के अनुसार सोमवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर सुबह आठ बजे 70.28 मीटर था।
अस्सी घाट पर चढ़ा बाढ़ का पानी।
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12 घंटों में रात आठ बजे तक 24 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई और जलस्तर 70.52 मीटर पर पहुंच चुका था। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सुबह जलस्तर में बढ़ाव की गति ढाई सेंटीमीटर प्रति घंटे थी। 10 बजे से दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार बनाते हुए जलस्तर दोपहर दो बजे 70.40 मीटर पर पहुंच गया था। इसी गति के साथ सायं छह बजे जलस्तर 70.48 एवं रात आठ बजे 70.52 मीटर दर्ज किया गया।
पानी के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते बाढ़ पीड़ित।
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आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को सुबह आठ बजे जलस्तर 70.62 मीटर हो सकता है। जलस्तर गंगा घाटों को पूरी तरह जलसमाधि देकर अब शहरी आबादी की ओर घुसने को बेचैन है। जबकि गंगा से सटे निचले इलाके पहले ही पानी से घिरे चुके हैं। नालों के रास्ते पानी आगे बढ़ते हुए नए क्षेत्रों में घुस जाएगा। गंगा के कारण वरुणा में पलट प्रवाह से वहां की बड़ी आबादी पर फिर से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी का असर गंगा घाट से सटे सड़कों पर भी नजर आने लगा है।
बाढ़ के पानी के बीच दूसरे स्थान पर जाता युवक।
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दशाश्वमेध घाट पर गंगा का पानी सीढ़ियों को जलसमाधि देते हुए सड़क पर लहराने लगा है। अस्सी घाट पर पानी पहले ही सड़क पर भर चुका था। उधर, मणिकर्णिका घाट की गली जलमग्न है। नाव के सहारे शवों को अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचाया जा रहा है। वहां शवदाह छत पर हो रहा है जबकि हरिश्चंद्रघाट पर गली में चिताएं जल रही हैं।
ड्रोन से ली गई बाढ़ की फोटो।
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नगवा इलाके में बाढ़ का संकट, रामेश्वर मठ के बगल वाले रास्ते पर चढ़ा पानी
वाराणसी। गंगा में लगातार बढ़ते जलस्तर से नगवां इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के निवासी अब अपने सामान को सुरक्षित करने और पानी बढ़ने पर राहत शिविरों का रुख कर रहे हैं। नगवां नाले का पानी धीमी गति से बढ़ रहा है, हालांकि रामेश्वर मठ के भीतर अभी पानी नहीं घुसा है। मठ के बगल से गुजरने वाले रास्ते पर सोमवार को पानी एक फीट और चढ़ गया।
बाढ़ के कारण घाट किनारे खड़े नाव।
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सड़क तक आया वरुणा का पानी
गंगा में बढ़ाव के कारण वरुणा में पलट प्रवाह हो गया है। वरुणा का रुख सोमवार को घनी आबादियों की ओर हो गया है। पानी नए इलाकों में तेजी से अपनी पहुंच बनाने लगा है। शास्त्री घाट और कॉरिडोर को डुबोने के बाद वरुणा का पानी धीरे-धीरे बस्तियों की ओर बढ़ने लगा है।