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रामलीला: अहंकारी रावण ने श्रीराम से लिया बैर, कुम्भकर्ण और मेघनाद का वध; रामनगर में लगे प्रभु के जायकारे

Tue, 30 Sep 2025 06:15 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रामनगर में लीला प्रेमियों की भी उमड़ पड़ी थी। लीला का मंचन होते ही प्रभु श्रीराम के जयकारे लगने लगे। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस टीम जगह-जगह तैनात रही।
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रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कहते हैं, जब विपत्ति आती है, तो पहले बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। रावण के साथ भी यही हुआ। अहंकार के दानव ने उसे ऐसा घेर लिया कि वह प्रभु श्रीराम से ही बैर ठान बैठा। मंदोदरी, विभीषण, यहां तक कि कुंभकर्ण ने भी उसे समझाया, लेकिन विनाश काले विपरीत बुद्धि” वह सब कुछ गंवा बैठा। भाई, बंधु, कुटुंब, नातेदार... सभी को काल के गाल में झोंक दिया।

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रामलीला के 24वें दिन (सोमवार) मंचन के दौरान कुंभकर्ण युद्ध और वध, मेघनाद युद्ध, नागपाश तथा वध लीला का सजीव व भावपूर्ण चित्रण हुआ। प्रसंग के अनुसार, रावण के दूत यह सूचना देते हैं कि लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त हो गई है। 

अपनी सेना की पराजय से व्यथित रावण अनेक प्रयासों से अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाता है। कुंभकर्ण, रावण की व्याकुलता का कारण पूछता है। रावण जब सारी स्थिति बताता है, तो कुंभकर्ण उसे धिक्कारते हुए कहता है, अभी भी समय है, अहंकार छोड़कर प्रभु श्रीराम का स्मरण कर, तभी तेरा भला होगा। तुमने मुझे जगा कर अच्छा नहीं किया। आओ, अब अंतिम बार गले मिल लूं, क्योंकि अब समय शेष नहीं है।

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प्रभु श्रीराम के लगे जयकारे

इसके बाद वह युद्ध के लिए रणभूमि में पहुंचता है। उसका विशालकाय शरीर देख वानर-भालू सेना भयभीत हो उठती है। सुग्रीव उससे युद्ध करते हैं और उसका नाक-कान काट लेते हैं। सेना को व्याकुल देख प्रभु श्रीराम स्वयं युद्ध करते हैं और अंततः कुंभकर्ण का वध कर देते हैं। उसका कटा हुआ मस्तक लंका जाकर गिरता है। यह देखकर रावण दहाड़ मारकर विलाप करता है। देवता प्रसन्न होकर प्रभु पर पुष्पवर्षा करते हैं।

रावण को दुखी देखकर उसका पुत्र मेघनाद उसे सांत्वना देता है और युद्ध हेतु रथ पर सवार होकर आकाश मार्ग से रणभूमि पहुंचता है। वहां वह अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करता है, जिससे श्रीराम की सेना भयभीत हो जाती है। मेघनाद, श्रीराम को नागपाश में बांध देता है। नारद के निवेदन पर गरुड़ प्रकट होकर प्रभु को नागपाश से मुक्त कराते हैं।

ऐसे हुआ समापन

रामनगर की रामलीला का भावपूर्ण मंचन। - फोटो : अमर उजाला
श्रीराम बाण चलाकर मेघनाद को मूर्छित कर देते हैं। मूर्छा टूटने के बाद मेघनाद यज्ञ की तैयारी करता है। विभीषण राम को बताते हैं कि यदि उसका यज्ञ पूर्ण हो गया, तो उसे मारना कठिन होगा। तब राम, लक्ष्मण और वानर-भालू सेना के साथ उसका यज्ञ विध्वंस कराते हैं। 

इसके बाद मेघनाद मायावी रूप धारण कर लक्ष्मण से युद्ध करता है, लेकिन इस बार लक्ष्मण उसका वध कर देते हैं। हनुमान उसका शव लंका के द्वार पर रख आते हैं। पुत्र का शव देखकर रावण मूर्छित हो जाता है। होश आने पर वह मंदोदरी से कहता है, “यह संसार नाशवान है, सब कुछ ब्रह्मा का रचा हुआ प्रपंच है।” यहीं पर आरती के साथ लीला का समापन होता है।
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अवगुन कवन नाथ मोहि मारा, मैं बैरी, सुग्रीव पियारा
रामबाग गोकुलपुर की श्रीरामलीला में श्रीराम-सुग्रीव मित्रता और बालि वध की लीला का सुंदर एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज करते हुए किष्किंधा पहुंचते हैं, जहां सुग्रीव, अपने भाई बालि के भय से ऋष्यमूक पर्वत पर निवास करते हैं। दोनों भाइयों को देखकर भयभीत सुग्रीव, हनुमान जी को उनका परिचय जानने भेजते हैं। 

हनुमान जी दोनों से भेंट कराते हैं और उनकी मित्रता कराते हैं। श्रीराम, सुग्रीव के संदेह दूर करने के लिए एक ही बाण से सात ताड़ के पेड़ और भांडुकी राक्षस की हड्डी को भेद देते हैं। तब सुग्रीव, श्रीराम के बल पर विश्वास कर, बालि को युद्ध के लिए ललकारते हैं। युद्ध में श्रीराम बालि का वध कर देते हैं। मरने से पहले बालि प्रभु श्रीराम से कहता है... अवगुन कवन नाथ मोहि मारा, मैं बैरी, सुग्रीव पियारा...
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