वाराणसी। रावण की सभा में राक्षस अंगद का पांव नहीं हिला सके। रावण जब स्वयं उठकर अंगद का पैर उठाने के लिए झुकता है तो अंगद कहते हैं कि हे रावण तुझे झुकना ही है तो राम की शरण में जा। तेरा कल्याण होगा। रावण का मानमर्दन करने के बाद अंगद भगवान राम के पास लौट आते हैं। रामनगर की रामलीला में शुक्रवार को रामजी का सेना सहित सिंधु पार होना, सेना वर्णन, सुबेल गिरी विश्राम, अंगद विस्तार की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान लंका कांड के 38 दोहों तक का सस्वर पाठ किया गया।
श्रीराम सेना को सेतु पार करने की अनुमति देते हैं। उधर मंदोदरी पुन: रावण को समझाती है कि जानकी को वापस भेज दिजिए और पुत्र को राज देकर वन में रघुनाथ का भजन कीजिए। तब रावण किसी से न डरने के लिए कहता है। दूत ने रावण से श्रीराम की सेना के वीर नल-नील, अंगद, जामवंत, सुग्रीव, हनुमान की शक्ति का बखान किया। इस पर रावण के मंत्री उससे कहते हैं कि नाहक परेशान न हों। वानर-भालू तो हमारे आहार हैं। विभीषण से विचार-विमर्श बाद श्रीराम एक बाण मारते हैं जिससे रावण की सभा के छत्र मुकुट गिर जाते हैं। जामवंत की सलाह पर श्रीराम अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजते हैं। रावण की राजसभा में अंगद अपने पैर जमा देते हैं। अपने बलशाली राक्षसों के पैर न हटा पाने पर रावण खुद उठता है। तब अंगद उसे समझाते हैं कि हमारे चरणों में तुम्हारा उद्धार नहीं है। प्रभु श्रीराम के चरण पकड़ो, वही तेरा उद्धार करेंगे। फि र अंगद लौट जाते हैं। इधर अंगद श्रीराम से रावण के पुरुषार्थ और उसकी सेना का वर्णन करते हैं। इसी के साथ भगवान की आरती के बाद लीला को विराम दिया गया।