देवताओं के निवेदन का स्वीकार करते हुए माता सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि में कुमति का वास करा दिया। मंथरा की कुमति ने अयोध्या की खुशियों पर पानी फेर दिया और उसके बहकावे में आकर कैकेयी कोपभवन में पहुंच गईं। बृहस्पतिवार को तुलसीघाट की रामलीला में राज्याभिषेक की तैयारी और कोप भवन का मंचन किया गया।
राम के राज्यभिषेक की तैयारी को लेकर अवध में बधावे बज रहे थे। राजतिलक की तैयारी देख कैकेयी के पास पहुंची मंथरा ने उसे याद दिलाया कि तुम्हारे दो वरदान राजा दशरथ के पास पड़े हुए हैं। इसी मौके पर भरत को राजगद्दी और राम को वनवास मांग कर अपनी छाती ठंडी कर लो। कैकेयी मंथरा के समझाने के बाद कोप भवन में चली जाती है। वहीं दूसरी तरफ श्री चित्रकूट रामलीला समिति की ओर से अयोध्या भवन में हुई रामलीला के दौरान भरत जी भगवान राम को मनाने के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दौरान भरत घरनैल और भरत जी का भारद्वाज आश्रम में आतिथ्य की लीला का मंचन किया गया।