वाराणसी। संकटमोचन हनुमान मंदिर परिसर में बुधवार को तुलसीदास रामलीला के सूर्पणखा, खर दूषण वध और सीता हरण का मंचन हुआ। पंचवटी मे भगवान श्रीराम व लक्ष्मण के मोहक रूप को देख सूर्पणखा मोहित हो जाती है। उन्हें रिझाने का प्रयास करती है। सफल न होने पर क्रोधित हो असली रूप में आती है। लक्ष्मण तलवार से उसका नाक व कान काट देते हैं। इससे क्रोधित सूर्पणखा भाइयों खर व दूषण के पास जाती हैै। खरदूषण सेना को ललकारते हुए श्रीराम से युद्ध करता है और मारा जाता है। सूर्पणखा लंका जाकर रावण को आप बीती सुनाती है।
रावण मारीच को स्वर्ण मृग का रूप धारण कर वहां जाने को कहता है, ताकि वह सीता का अपहरण कर सके। स्वर्ण मृग देख सीता श्रीराम से उसकी खाल लाने को कहती हैं। श्रीराम सीता की सुरक्षा लक्ष्मण को सौंप धनुष व बाण लेकर मृग मारीच के पीछे दौड़ पड़ते हैं। देर होने पर लक्ष्मण श्रीराम को खोजने चल देते हैं। उसी समय रावण संन्यासी का रूप धारण कर सीता के पास आता है और लक्ष्मण रेखा के बाहर आकर भिक्षा देने को कहता है। सीता के बाहर आते ही हरण कर आकाश मार्ग से चला जाता है। आकाश मार्ग में जटायु रावण को रोकता है। रावण तलवार से उसका पंख काट देता है। जटायु श्रीराम का उद्घोष कर जमीन पर गिर पड़ता है। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने आरती उतारी। वहीं चित्रकूट रामलीला में सूर्पणखा की नाक काटने की लीला का मंचन किया गया। आरती पं. मुकुंद उपाध्याय ने उतारी।