वाराणसी। घर परिवार और परिस्थितियों ने तो बेसहारा किया ही समाज की बंदिशें भी कदम दर कदम रोड़ा बनीं। इसके बावजूद कुछ कर गुजरने की तमन्ना तमाम पाबंदियों, फब्तियों और यातनाओं पर भारी पड़ी। कुछ ऐसी ही कहानी है माधोपुर निवासी मीना बरनवाल की परिवार में पुरुष प्रधान व पितृ सतात्मक सोच का दंश उन्हें अपने जीवन में झेलना पड़ा। दो बेटियों को जन्म देते ही उनका पूरा जीवन ही बदल गया। पति की यातनाएं और परिवार वालों के तानों के बाद भी वो रिश्ते में बधी रहीं। लेकिन एक दिन आखिरकार पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। जीवन के इस रूप सत्य से मीना पूरी तरह टूट गईं। लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों को अपनी ताकत बनाया। दोनों बेटियों के साथ उन्होंने अपना नया जीवन शुरू किया। अपनी पढ़ाई लिखाई के बल बूते उन्होंने घर-घर जाकर ट्यूशन पढ़ाया और अपनी बेटियों को अच्छी परवरिश दी।
लॉकडाउन में जब उन पर आर्थिक संकट आया तब भी उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी । वेस इंडिया की अंजू सिंह ने इसमें उनकी काफी मदद की। अपनी बेटियों की परवरिश व घर चलाने के लिए उन्होंने लॉकडाउन में घर-घर सैनिटाइजर, फिनायल, बेकरी आदि सामान लेकर घर-घर पहुंचाना शुरू किया। इससे काम से जो पैसे मिलते उससे ही वह अपना घर चला रही थी। अपनी बेटियों की देखभाल करने के साथ ही मीना जानवरों की भी सेवा में तत्परता से लगी हुई है। लॉकडाउन में जहां उनके पास पैसे नहीं थे, उन्होंने उस बुरे वक्त में भी जानवरों का पेट भरा।