भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को रेशम व स्नेह के कच्चे धागे से बांधने वाले रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर इस बार राहु की नजर बनी हुई है। इस बार राहु काल श्रावण पूर्णिमा के दिन सुबह से लेकर दोपहर 11.59 तक है।
इसके कारण रक्षाबंधन का पूर्ण काल राहु काल समाप्त होने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। इसके बाद रात में चंद्र ग्रहण भी लग रहा है और इसका सूतक छह घंटा पहले ही माना जाता है।
पंडित आचार्य राधारमण पांडेय का कहना है कि श्रावण पूर्णिमा के दिन भाई बहन का पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन का एक अलग ही महत्व है। उन्होंने बताया कि इस बार राहु काल सुबह सात बजे से दोपहर के 11.59 तक है। राहु काल में शुभ कार्य वर्जित है।
दोपहर 12 बजे के बाद से मुहूर्त प्रारंभ हो रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट से संचालित सकलडीहा रेलवे स्टेशन पर स्थित स्वयं भू कालेश्वरनाथ मंदिर के आचार्य पंडित रामनिवास पांडेय कहते हैं कि सनातन धर्म में हर कार्य मुहूर्त के हिसाब से ही करना चाहिए।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव 9 घंटे पूर्व से होता है। जिससे चंद्र ग्रहण का प्रभाव दिन के एक बजे से प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन रक्षाबंधन व होली के दिन ऐसे ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है।
उन्होंने कहा कि निर्णय सिंधु के अनुसार रक्षाबंधन नियत काल में होने से भद्रा को छोड़कर ग्रहण के दिन भी अन्य दिनों के समान ही करना चाहिए। ग्रहण का सूतक अनियतकाल के कर्मों को रखता है। जबकि राखी श्रावण पूर्णिमा को होता है। इससे ग्रहण का दोष नहीं लगेगा।