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रक्षाबंधनः काशी विश्वनाथ को बांधी गई राखी, सावन पूर्णिमा पर मंगला आरती में उमड़े श्रद्धालु

Sun, 22 Aug 2021 02:12 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बाबा दरबार में मंगला आरती के दौरान आम दिनों के मुकाबले बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंगला आरती के बाद बाबा का झांकी दर्शन द्वार आम भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। श्रावण पूर्णिमा के मौके पर बाबा का झूलनोत्सव शृंगार किया जाएगा। 
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सावन पूर्णिमा पर मंगला आरती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में रक्षाबंधन के त्योहार का उल्लास घर-घर छाया है। सनातन धर्म में भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के पर्व रक्षाबंधन पर सबसे पहले सुबह छह बजे काशीपुराधिपति बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ को मंदिर के अर्चकों ने राखी बांधी। इसके बाद काशी में बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधनी शुरू की। 
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 श्रावण पूर्णिमा पर बाबा दरबार में मंगला आरती के दौरान करीब दो सौ लोग जुटे थे। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण बाबा दरबार में मंगला आरती के दौरान आम दिनों के मुकाबले बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंगला आरती के बाद बाबा का झांकी दर्शन द्वार आम भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया।

श्रावण पूर्णिमा के मौके पर बाबा का झूलनोत्सव शृंगार किया जाएगा। मंदिर परिसर को कामिनी की पत्तियों और फूलों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए कराई गई बैरिकेडिंग में रेड कार्पेट बिछाया गया है। मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से अलग-अलग मार्ग तैयार किए गए हैं।
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तीनों मार्ग में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसलिए मंदिर प्रशासन द्वारा सभी प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर और थर्मल स्कैनिंग करने की व्यवस्था की गई है। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सभी श्रद्धालुओं को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।
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झूले में झूलेंगे काशीपुराधिपति, संग होंगे गौरा और गणेश

सावन की पूर्णिमा पर काशीपुराधिपति सपरिवार झूले पर विराजमान होंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर में झूलनोत्सव के लिए बाबा की रजत पंचबदन प्रतिमा टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से शाम  5:15 बजे मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। उससे पूर्व शाम 4:30 से 5:15 बजे तक महंत आवास पर विधि-विधान से पूजन एवं आरती की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

शाम में विग्रह के पूजनोपरांत मंदिर के अर्चक और महंत परिवार के सदस्य बाबा की पंचबदन प्रतिमा को सिंहासन पर विराजमान करके टेढ़ीनीम से साक्षीविनायक, ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए विश्वनाथ मंदिर तक ले जाएंगे। इस दौरान बाबा का विग्रह श्वेत वस्त्र से ढंका रहेगा।

मंदिर पहुंचने के बाद बाबा की पंचबदन प्रतिमा को माता पार्वती और गणेश के साथ पारंपरिक झूले पर विराजमान कराया जाएगा। दीक्षित मंत्र से पूजन के बाद सर्वप्रथम पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी बाबा को झूला झुलाएंगे। इसके उपरांत सप्तर्षि आरती कराने वाले महंत परिवार के सदस्य बाबा का झूला झुलाएंगे।
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