वर्ष 1993 में रामपुर के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे, छात्र नेता राजकुमार सिंह समेत तीन लोगों की जौनपुर के ही जमालापुर बाजार में दिनदहाड़े हत्या की। इस तिहरे हत्याकांड के बाद मुन्ना सुर्खियों में आया। पूर्वांचल में एके-47 का पहली बार इस्तेमाल भी मुन्ना ने ही किया था। 1996 में जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करने के बाद वह बाहुबली मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। 1996 में ही मुख्तार अंसारी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से चुनाव लड़ा और विधायक बने।
1998 में दिल्ली में एक एनकाउंटर के समय मुन्ना बजरंगी को समयपुर बादली में एक मुठभेड़ में कई गोलियां मारी थीं और मरा जानकर छोड़ दिया था। उस मुन्ना बजरंगी बहुत दिनों तक कोमा में रहा था और बाद में ठीक हो गया। दिल्ली में हुई मुठभेड़ में उसका खास साथी मार गया था। उसका गिरोह छिन्न भिन्न हो गया था। अब फिर से उसे अपना गैंग खड़ा करना था।
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उसी दौरान जेल में बंद हनुमान पांडेय को अभय सिंह ने मुन्ना बजरंगी से मिलवाया था। राकेश पांडेय की वाफादारी मुन्ना को भा गई और दोनों साथ-साथ वारदात को अंजाम देने लगे। मुन्ना बजरंगी ने राकेश को मुख्तार अंसारी से मिलवाया।
विधायक मुख्तार अंसारी।
- फोटो : अमर उजाला
1995-2000 के आसपास मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय की दुश्मनी चरम पर थी। उस दौरान बृजेश सिंह भूमिगत थे और कृष्णानंद राय फ्रंट फुट पर थे। उस समय राकेश पांडेय अपराधों की दुनिया में बड़ा हो रहा था।
जब मुन्ना बजरंगी को राकेश का साथ मिल गया था, 29 नवंबर 2005 को मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। उस दिन वह एक वॉलीबॉल टूर्नामेंट का उद्घाटन करने जा रहे थे, रास्ते में उन्हें घेर लिया और एके 47 से फायरिंग कर जीप में सवार सभी 7 लोगों की हत्या कर दी गई। कुल 400 राउंड फायरिंग की गई थी।
आरोप लगा कि मुख्तार के कहने पर मुन्ना बजरंगी एंड कंपनी ने इस वारदात को अंजाम दिया है। जांच के दौरान राकेश पांडेय का नाम इसमें जोड़ा गया। लेकिन पुलिस के पास फोटो न होने से पुलिस उस पर एक्शन नहीं ले पाई। वह फरार होने में कामयाब रहा। बाद में पुलिस को बनारस के एक होटल की सीसीटीवी फुटेज मिली, जिसमें राकेश पांडेय दिखा था। 2006 में उसे कृष्णानंद हत्याकांड में गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बाद में बाहर आ गया। वहीं, विधायक हत्याकांड के बाद मोस्ट वांटेड बने मुन्ना पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया।
ताबड़तोड़ वारदातों के बाद कुख्यात हो चुके मुन्ना को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस के तेज तर्रार अफसरों वर्षों तक दिन रात एक कर दिया, मगर उसका सुराग लगा पाने में नाकाम रहे। अक्टूबर 2009 में दिल्ली पुलिस ने मुंबई के मलाड से जब मुन्ना को गिरफ्तार किया, तब उनके पास मुन्ना की 20 साल पुरानी तस्वीर थी, जिससे उसका चेहरा काफी बदल चुका था। राकेश पांडेय जेल से बाहर था और वह मुख्तार अंसारी गिरोह के साथ जुड़ा हुआ था। वह मुख्तार का दाहिना हाथ और शूटर बन गया था। उसके बाद मुन्ना बजरंगी और मुख्तार में फिर से दोस्ती हो गई थी।
माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी
- फोटो : file photo
वर्ष 2009 में 29 अगस्त की शाम को जिले में पीडब्ल्यूडी के ए-क्लास ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की हत्या में हनुमान पांडेय का नाम आया। शहर के व्यस्ततम गाजीपुर तिराहा पर 29 अगस्त 2009 की शाम गोलियों से छलनी करके मन्ना सिंह की हत्या कर दी गई थी।
इसके बाद तत्कालीन एआरटीओ ऑफिस हकीकतपुरा पर मन्ना सिंह के करीबी राम सिंह मौर्य और गनर सिपाही सतीश कुमार की दोहरे हत्याकांड में भी राजा चौहान सहित कई हत्यारों के साथ हनुमान पांडेय का नाम आया। हनुमान के खिलाफ दक्षिण टोला में मुकदमा दर्ज है।
2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार आई. इस दौरान मुन्ना बजरंगी झांसी की जेल में बंद था। उसने बीएसपी के पूर्व विधायक से रंगदारी मांगी थी। पेशी के लिए उसे बागपत जेल लाया गया था। 9 जुलाई 2018 को उसकी जेल में ही हत्या कर दी गई। मुन्ना बजरंगी ने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में करीब 40 हत्याएं की। इसमें बदमाश सुनील राठी के अलावा कई बाहुबली नेताओं का भी नाम सामने आया था।
बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद अपनी निशानेबाजी और वफादारी की वजह से राकेश पांडेय मुख्तार का खास बन गया। मऊ जिले में हनुमान के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं। हत्या के दो मुकदमे (एक शहर कोतवाली और एक दक्षिण टोला थाना में), गैंगेस्टर के दो मुकदमे तथा साक्ष्य छिपाकर लाइसेंसी असलहा लेने के आरोप में कोपागंज थाने में एक मुकदमा दर्ज हैं। इसके अलावा जबकि पांच मुकदमे लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली और गाजीपुर में अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हनुमान पांडेय पर कुल दस अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार, एसटीएफ के एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि एसटीएफ को इनपुट मिला था कि अपराधी इनोवा कार से जा रहा है। लखनऊ-कानपुर हाईवे पर सरोजनी नगर थाने के पास उसे रोकने की कोशिश की गई लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ की जवाबी फायरिंग में वह मारा गया।