यूजीसी नियमावली में फेरबदल के सवाल पर राजर्षि चौधरी ने जातिगत राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश को जाति-पात में उलझाकर रखने की कोशिशें लगातार हो रही हैं, जबकि सरकारों को विकास और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा को वोट बैंक की राजनीति का हथियार बना दिया गया है, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटक रहा है। जाति के नाम पर फैसले लेने से न तो विश्वविद्यालय मजबूत होंगे और न ही भारत विश्वगुरु बन पाएगा।
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काशी में अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को लेकर उठे विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को विकास के नाम पर इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान शासिका केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि हिंदू स्वाभिमान का प्रतीक हैं। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना समाज से संवाद किए फैसले लेना सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
राजर्षि चौधरी ने कहा कि उनकी यह यात्रा केवल मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदू समाज को राजनीतिक और सामाजिक रूप से जागरूक करने का अभियान है।