फ्लैट अरुण यादव के नाम है, लेकिन संचालन कौन करता था? क्या पति-पत्नी अलग रहते हैं? यदि हां, तो कब से और इसका प्रमाण क्या है? जब अखबार का ऑफिस उसी फ्लैट में चल रहा था, तो सारी गतिविधियों की जानकारी किसके पास थी? आठ माह से 'रैकेट' चल रहा है क्या फ्लैट मालिक को कोई जानकारी नहीं थी? फर्जी एग्रीमेंट बनाकर सच नहीं छिपाया जा सकता। महिला कांग्रेस इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पर कार्रवाई की मांग करती है।
फ्लैट की स्वामित्व व उपयोगिता की जांच की जाए और वास्तविक जिम्मेदार व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई हो। पूर्व की भांति 'रैकेट' के स्वामित्व भवनों के भवन स्वामियों पर कार्रवाई हुई है उसी आधार पर जांच करके अरुण यादव और शालिनी यादव पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए जिससे भविष्य में इस तरह के अनैतिक कार्य दोबारा ना किया जा सके।