वाराणसी। सावन के अंतिम सोमवार पर देवाधिदेव महादेव की नगरी में अविमुक्तेश्वर के प्रति अनंत भक्ति दिखी। भक्तों ने शिवालयों में अर्जी लगाने के लिए कतार लगाई। नंदी को अपनी मुराद सुनाई और बाबा से सुख-समृद्धि की गुहार लगाई। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से मार्कंडेय धाम तक श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का रेला उमड़ा रहा। बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार की माला सहित विविध नैवेद्य चढ़ाए। गंगधार से गंगाधर का जीभर अभिषेक किया।श्रीकाशी विश्वनाथ के अलावा मार्कंडेय धाम, महामृत्युंजय, तिलभांडेश्वर, गौरी केदारेश्वर, जागेश्वर, ओंकारेश्वर, सारंगनाथ महादेव, शूलटंकेश्वर, कर्दमेश्वर, रामेश्वर महादेव सहित विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भीड़ रही। इन शिवालयों में भी चार से पांच लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर दर्शन-पूजन किया। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।
सावन का अंतिम सोमवार होने के चलते श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भीड़ रविवार से ही शहर में उमड़ने लगी थी। श्रीकाशी विश्वनाथ और मार्कंडेय महादेव में कांवड़ियों की भीड़ ज्यादा रही। अन्य प्रमुख शिवालयों में स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के जिलों और तीर्थयात्रा पर आए श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर दर्शन-पूजन किया। शिवालयों में मंगला आरती के साथ जलाभिषेक व दर्शन शुरू हुआ। श्रद्धालु जल और विविध नैवेद्य लेकर ओम नम: शिवाय मंत्र का जप और हर-हर महादेव का जयघोष कर रहे थे। सुबह करीब 10 बजे तक सभी शिवालयों में कतार लगी रही। महामृत्युंजय में सुबह 10 बजे तक भीड़ रही। बाबा का हरियाली शृंगार हुआ। जागेश्वर महादेव में फूलों और फलों से शृंगार कर 56 भोग लगाया गया। तिलभांडेश्वर महादेव में सुबह कतार लगी थी। दिन में भीड़ कम रही। बाबा का जलभरी और हरियाली शृंगार कर खीर का भोग लगाया गया। गौरी केदारेश्वर मंदिर के दोनों तरफ गलियों में कतार लगी थी। बाबा का फूलों व पत्तियों से हरियाली शृंगार हुआ। कर्दमेश्वर महादेव मंदिर, कंदवा में दर्शन के लिए दो लाइनें लगी थीं। महिलाओं और पुरुषों की लाइनें अलग-अलग लगवाई गई थीं। सारंगनाथ, ओंकारेश्वर, शूलटंकेश्वर महादेव व रामेश्वर महादेव में भी दर्शन के लिए भीड़ रही।
मार्कंडेय महादेव का भस्म शृंगार, दो लाख भक्तों ने किए दर्शन
चौबेपुर। सावन के अंतिम सोमवार पर कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से कांवड़ियों और शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ा। हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ शिवभक्तों ने जलधारी से बाबा का जलाभिषेक किया। बाबा का भस्म शृंगार हुआ। भोर में दो बजे मंगला आरती के बाद दिन भर दर्शन चला। रात में 11 बजे बाबा की शयन आरती हुई। पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, चंदौली, आजमगढ़ आदि कई प्रमुख जगहों से शिवभक्तों की भीड़ रैन बसेरा और संगम घाट पर रही। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते रहे। दोपहर में भीड़ कम रही, मगर तीन बजे के बाद फिर बढ़ गई। एसीपी सारनाथ विनय कुमार द्विवेदी की निगरानी में पुलिस के जवान तैनात रहे। संवाद
ग्रामीण शिवालयों में भी जलाभिषेक कर की सुख-समृद्धि की कामना
वाराणसी। ग्रामीण क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भी जलाभिषेक के लिए भीड़ रही। गांव की महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में पहुंचे थे। राजातालाब क्षेत्र के गंधर्वेश्वर महादेव, भीमचंडी, बाजीराव का पेशवा शंकर मंदिर असवारी, शाहंशाहपुर के प्रमुदेश्वर महादेव शिव मंदिर, जक्खिनी के पोखरे पर स्थित शिव मंदिर पर भारी भीड़ रही। पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के काशीपुर, मातलदेवी, राजातालाब के कालभैरव मंदिर और रानी बाजार के शिव मंदिर में भीड़ रही। प्राचीन शिवधाम मंदिर दरेखू, बाणासुर मंदिर नरउर, बुढऊ महादेव मंदिर मोहनसराय, भगवती माता मंदिर अखरी आदि शिव मंदिरों में जलाभिषेक व दर्शन-पूजन हुआ। संवाद