शांहशाहपुर गांव स्थित राम जानकी कुटिया पर रामचरित मानस की चौपाइयों से निर्मित चित्रांकन कौतूहल पैदा करने वाला है। 50-60 वर्ष पहले इस कुटिया में रहने वाले पुजारी गोबिंद दास ने यह चित्रों वाली रचना की है। अगर आप चित्रों को ध्यान से देखे तो आगे एक सीधी लाइन देखेंगे। आगे पहाड़ जैसा चित्रण है, जो आगे रास्ते का द्योतक है और आगे पर्वत का दृश्य प्रस्तुत करता है। इसे किष्कंधा कांड की चौपाई आगे चले बहुरि रघुराया ऋषमूक पर्वत नियराया के आधार पर बनाया गया है। इस चौपाई को नीचे से सीधे ऊपर या दाएं से वाएं साफ-साफ पढ़ा जा सकता है।
गांव के 70 बर्षीय हरिप्रसाद सिंह बताते है कि पंजाब से आए पुजारी गोविंद दास को रामचरित मानस कंठस्थ था और उन्होंने उसे हाथ से कागज़ पर लिख दिया। गाँव की प्रधान चंद्रकला व पूर्व प्रधान कृष्णेश्वर सिंह बताते कि पुजारी गोविंद दास द्वारा हस्तलिखित रचना कुटी में सुरक्षित व संरक्षित है। कथा वाचक पं नंदलाल उपाध्याय का कहना है कि मानस की चौपाई से ऐसी सुंदर रचना हुई होगी, कभी न सुना गया और न ही कभी देखा गया।