मोहर्रम की आठवीं तारीख सोमवार को अलम, दुलदुल और ताबूत के जुलूस उठाए गए। हुसैनी लश्कर के अलम बरदार हजरत अब्बास की याद में उठे जुलूस की जियारत करने सैकड़ों अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। कोई ताबूत को छूकर मन्नतें मांग रहा था तो कोई दुलदुल को शिरनी खिलाकर अपनी मुरादों के पूरी होने की दुआ कर रहा था।
कदीमी तुरबत का जुलूस चाहमामा दालमंडी स्थित नब्बू खां के आवास से अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम उठाया गया। शराफत अली ने बेहतरीन मरसिया पढ़ा। उस्ताद फतेह अली खां ने शहनाई पर आंसुओं का नजराना पेश किया। जुलूस देर रात फातमान पहुंचा। मुर्तुजा शमशी ने मजलिस पढ़ी। संयोजन मुनाजिर हुसैन का, शफक रिजवी ने संचालन किया।मुर्तुजा शमसी ने मजलिस पढ़ी।
चौहट्टा लाल खां में मिर्जा मेहंदी के इमामबाड़े से ताबूत का जुलूस उठा जो इमामबाड़ा मीर घूरा आकर खत्म हुआ। चौहट्टा लाल खां से ही एक दूसरा खास जुलूस उठा। आलिम हुसैन के निवास से ये जुलूस अंधेरे में उठाया जाता है। इसी तरह अर्दली बाजार में जियारत हुसैन के निवास से सद्दू भाई के संयोजन में, शिविला में डिप्टी जाफर बख्त की मस्जिद से जुलूस उठे।