दूर देशों में नौकरी करने गए लोगों के लिए इस ईद में घर वालों की दीद मुश्किल होगी। कतर में मेहनत-मजदूरी के लिए गए पूर्वांचल के हजारों लोगों की ईद पर घर वापसी पर संकट खड़ा हो गया है।
सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन की ओर से कतर के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ने और किसी तरह का संपर्क न रखने के कारण उनकी वापसी का खर्च करीब तीन गुना बढ़ गया है। ऐसे में अब उनके लिए न सिर्फ त्योहार मनाना मुश्किल होगा बल्कि उनकी वापसी की राह भी मुश्किल हो गई है।
घरवालों की जो फिक्र बढ़ी वो अलग। फिर चाहे वो लोहता मंगलपुर के रहने वाले तबरेज का परिवार हो या फिर कोटवां के रहने वाले बबलू खान का।
पूर्वांचल के दस हजार से अधिक लोग सऊदी, ओमान, कतर और कुवैत में रोजगार कर रहे हैं। इनमें से करीब 20 फीसदी लोग कतर में हैं।
खाड़ी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के चलते वहां आने-जाने वाली फ्लाइट भी रद्द कर दी गई हैं। इससे फ्लाइट्स का किराया भी अचानक तीन गुना हो गया है। पहले जहां कतर से भारत की फ्लाइट की टिकट 12000 रुपये में थी, बढ़कर तीस हजार तक चली गई है।
टूर एडवाइजर सुधांशु सक्सेना बताते हैं कि कतर एयरलाइंस की फ्लाइट्स दूसरे एयरलाइंस से काफी सस्ती होती थीं।
चूंकि रमजान चल रहा है। इस वक्त लोग ईद मनाने के लिए लोग अपने घर लौटते हैं।
ईद की तैयारियों के लिए जहां रमजान महीने में खर्च अन्य महीनों की बनिस्बत तीन से चार गुना बढ़ जाता है। पैसे भेजने में दिक्कत जो होगी जो अलग, ऐसे में घर लौटने के लिए वे अतिरिक्त टिकट का खर्च कैसे उठाएंगे, ये उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है।