भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान काशी की जनता ने भी अंग्रेजों का प्रतिकार शुरू कर दिया था। बीएचयू के छात्रों ने आजादी के आंदोलन से जन-जन को जोड़ा। यह आग धीरे-धीरे पूरे पूर्वांचल तक फैल गई।
काशी के क्रांतिकारियों पर शोध कर रहे नित्यानंद राय ने बताया कि 13 अगस्त को टाउनहॉल पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया। इसमे बिंदेश्वरी पाठक व रविकांत मिश्रा बुरी तरह घायल हो गए। जनता भङ़क गई और पुलिस पर पत्थर बरसाने लगी पुलिस ने 26 राउंड फायर किये बहुत से लोग मारे गए व बहुत से घायल हुए। 14 अगस्त को छात्रों ने लोकल पैंसेजर पर तिरंगा फहराया और उसे बलिया तक ले गए। ज्यों-ज्यों आंदोलन तेज होता गया उससे आंदोलनकारियों ने पूरा सिस्टम ध्वस्त कर दिया। तार काट डाले और संचार तंत्र पूरी तरह धवस्त हो गया। रेलवे की पटरिया उखाड़ दी गईं। रेलवे स्टेशन तहस नहस कर दिए गए। स्टेशनों को आग के हवाले कर दिया गया। इलाहाबाद, बनारस, गया, पटना रेलवे लाइन तो एकदम से ध्वस्त हो गई। जीटी रोड भी जगह जगह नष्ट कर दिया गया। पोस्ट ऑफिस जला दिए गए। बाबतपुर व रजवारी एरोड्रम को भी काफी नुकसान पहुंचा।