देशभर के तीर्थ पुरोहितों के विचार भी इसमें शामिल किए जाएंगे। साथ ही पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में केरल और तमिलनाडु में बनाए गए पुरोहित कल्याण बोर्ड की नियमावली का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही सभी शंकराचार्य से भी इस मामले में मार्गदर्शन लिया जाएगा। अहम बात यह है कि इस नियमावली को तैयार करने के दौरान हिंदू धर्म के सभी पंथों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
महीने भर में तैयार होगा नियमावली का स्वरूप
परिषद की बैठक के बाद मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों के संत व पुरोहितों के सुझाव भी मांगे जाएंगे। सभी सुझाव प्राप्त होने के बाद विद्वानों की टीम इस पर विमर्श करेगी। महीने भर के अंदर बोर्ड की नियमावली को स्वरूप दिया जाएगा। इसके बाद इसे मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।
परिषद के महामंत्री ने बताया कि बोर्ड की नियमावली में पुजारी, तीर्थ पुरोहित, सेवईत, पुरोहितों के हितों के संरक्षण के साथ ही मठ-मंदिरों की जमीनों को संरक्षित करने के भी इंतजाम होंगे। इसके साथ ही युवा पुजारी व संस्कृत के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण का भी इंतजाम किया जाएगा। मठ-मंदिरों में होने वाले उत्तराधिकार के विवादों को सुलझाने के लिए भी कुछ बिंदुओं को नियमावली में जोड़ा जाएगा।