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शानदार नतीजों के लिए खिलाड़ियों को वक्त पर मदद मिलेः पूनम यादव

Sat, 14 Apr 2018 02:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पूनम यादव - फोटो : अमर उजाला
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कामनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता पूनम यादव ने शुक्रवार को युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही सरकार को भी आगाह किया। अपने गांव दांदूपुर पहुंची पूनम ने युवाओं को नसीहत दी कि वे पैसों के पीछे नहीं भागें और मेहनत करें।
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मेहनत से जब आप जीतना शुरू करेंगे तो पैसा खुद-ब-खुद पीछे भागेगा। माना कि सरकार खिलाड़ियों पर ध्यान तो दे रही है लेकिन सब जूनियर और जूनियर स्तर पर मदद मिल जाए तो प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है। जब खिलाड़ियों को जरूरत होती है तो मदद नहीं मिलती है।

जब हम बेहतर करने लगते हैं तो सरकार भी मदद करती है। पूनम यादव ने कहा आज मेरे लिए बहुत बड़ा दिन है। यह मेरी तैयारियों और मेहनत का फल है कि मुझे गोल्ड मेडल मिला है।
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जब मैंने इस गेम में जाने की सोची थी तब पापा के पास खाने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे, वह दूसरों से लेकर मुझे खिलाते थे। आज मैंने पापा का सपना पूरा किया है। खुद की सफलता को माता-पिता की मेहनत और आशीर्वाद का फल बताया।

पूनम ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान तो एक बार ऐसा लगा था कि मैं जीत नहीं पाऊंगी लेकिन भगवान का आशीर्वाद रहा और मैंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। कहा, सरकार ने जो इनाम और पद की घोषणा से खुशी हुई है। यह अच्छी बात है।

शादी के सवाल पर पूनम का कहना था कि माता-पिता जब कहेंगे मैं शादी के लिए तैयार हूं लेकिन अभी मेरा सारा ध्यान अगस्त में होने वाले एशियाड चैंपियनशिप पर है।

एशियाड चैंपियनशिप जकार्ता में होनी है। पूनम ओलंपिक में भी गोल्ड मेडल जीतना चाहती है। भारोत्तोलन में फिटनेस सबसे अहम होती है। खिलाड़ियों को ज्यादा खतरा घायल होने का रहता है। मुझे अभी भी नी और शोल्डर में चोट लगी है। 
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हमार इच्छा ह कि बिटिया एहि तरे मेडल जीते... 

परिवार के साथ पूनम यादव - फोटो : अमर उजाला
हमार इच्छा ह कि बिटिया एहि तरे मेडल जीतत रहे... अउर देश का नाम रोशन करे। हमार बिटिया देश बदे सोना जितले ह। यह शब्द कहते-कहते पूनम के पिता कैलाश नाथ की आंखें नम हो उठीं। बेटी जब घर पहुंची तो उसके स्वागत के लिए लोगों की कतार देखकर उनका खुशियों का ठिकाना नहीं था।

पूनम की मां उर्मिला भी फख्र से कह रही थीं कि उन्होंने तो बेटी नहीं, बेटा पैदा किया था। आज ताना मारने वालों का भी मुंह बंद हो गया है। कैलाश जब बेटी के साथ घर लौटे तो खुशियां उनकी स्वागत कर रही थीं।

घर पर उल्लास का माहौल था। पड़ोस के लोग जो लुक-छिप कर देख रहे थे, वह पूनम के आते ही घरों से निकलकर बाहर आ गए। हर कोई कैलाश की किस्मत को सराह रहा था।

चाचा गुलाब यादव ने बताया कि मुफलिसी के दिनों में पूनम घर में सीमेंट से बने वेट से अभ्यास करतीं थी। इसी सीमेंट के वेट ने पूनम को कॉमनवेल्थ गेम में स्वर्ण पदक तक पहुंचाया। अब उनकी छोटी भतीजी पूजा यादव इस वेट से प्रैक्टिस करती है।

वहीं पूनम यादव के भावी जीवनसाथी डिस्कस थ्रो चैंपियन धर्मराज यादव भी स्वागत के लिए परिवार के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद थे। शादी के सवाल पर धर्मराज ने कहा कि एशियाड चैंपियनशिप के बाद सभी को खुशखबरी मिलेगी।

तीन साल पहले दोनों की पटियाला कैंप में मुलाकात हुई थी। मिर्जापुर के रहने वाले धर्मराज वर्तमान में जाट रेजीमेंट में तैनात हैं। धर्मराज विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अब तक नौ स्वर्ण पदक, 11 रजत तथा पांच कांस्य पदक जीत चुके हैं।

इसके अलावा सर्विसेज में 56.53 मीटर में सात बार गोल्ड जीतकर रिकार्ड बना चुके हैं। छह भाई एक बहन में सबसे छोटे धर्मराज ओलंपिक की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। 
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