एनएच-दो की कांवरियों के लिए आरक्षित लेन पर क्यों चल रहे मालवाहक
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इलाहाबाद से वाराणसी के बीच कांवरियों के लिए आरक्षित एनएच-दो की बायीं लेन पर बुधवार को गोरखपुर निवासी कांवरिया जय कुमार (32) को ट्रक की हल्की सी टक्कर लग गई। इससे गुस्साए कांवरियों ने रूपापुर के समीप वाहनों की आवाजाही रोक कर प्रदर्शन शुरू कर दिया और पुलिस-प्रशासन विरोधी नारेबाजी करने लगे।
सभी का कहना था कि कांवरियों के लिए एनएच-2 की आरक्षित की गई लेन पर मालवाहक क्यों चल रहे हैं। सूचना पाकर मिर्जामुराद पुलिस ने गुस्साए कांवरियों को शांत कराया और रास्ता खुलवाया। इस दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी।
सावन का पहला सोमवार खत्म होने के बाद मंगलवार की दोपहर से इलाहाबाद से वाराणसी के बीच एनएच-दो की आरक्षित बाई लेन पर भी मालवाहक धड़ल्ले से दौड़ने लगे। इसके पीछे मिर्जामुराद पुलिस का तर्क था कि कांवरियों की आवाजाही ना के बराबर है और जाम बहुत लंबा लग रहा है।
बुधवार को भी यही सिलसिला जारी रहा और रूपापुर के समीप आरक्षित लेन से जा रहे एक ट्रक से कांवरिया को हल्की टक्कर लग गई तो सभी नाराज होकर प्रदर्शन शुरू कर दिए। इसी तरह तमाचाबाद के समीप कांवरियों का झुंड आरक्षित लेन से वाहनों के गुजर जाने का इंतजार करता रहा। कांवरियों ने कहा कि एक लेन सुरक्षित रहने से दुर्घटना का खतरा नहीं था लेकिन मालवाहकों की जारी आवाजाही के कारण वाराणसी तक जाने में डर लग रहा है।
श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ने से चरमराई यातायात व्यवस्था
एक घंटे की दूरी तय करने में लग गया साढ़े छह घंटे का समय
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एनएच-2 के चौड़ीकरण के कार्य के कारण इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर गुड़िया बार्डर से लेकर मोहनसराय तक कांवरियों को गिट्टी, बोल्डर और कीचड़ से जूझना पड़ रहा है। वहीं, नगर क्षेत्र में भी मंडुवाडीह, कैंट रेलवे स्टेशन के सामने सहित कुछेक अन्य इलाकों में भी सड़क निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण कांवरियों को जूझते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर जाना पड़ रहा है। सावन मेला शुरू होने से पहले ऐसी समस्याओं का समाधान कराने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे लेकिन संबंधित विभागों के अफसरों के कान में जूं नहीं रेंगा।
वाराणसी शहर की यातायात व्यवस्था पहले से ही ध्वस्त है। सावन के महीने में देश नहीं दुनिया से श्रद्धालुओं का हुजूम रोजाना काशी विश्वनाथ की ओेर उमड़ रहा है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था न होने और यातायात संचालन की ठोस कार्ययोजना के अभाव में शहर की यातायात व्यवस्था और चरमरा गई है। ध्वस्त हो चुकी यातायात व्यवस्था के प्रति ट्रैफिक पुलिस के साथ ही थानेदार भी गंभीरता नहीं बरत रहे हैं।