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हजरत अली की शहादत पर गमगीन माहौल में उठाया जुलूस

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हजरत अली की शहादत पर शहर में गमगीन माहौल में जुलूस उठाया गया। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद शिया मुसलमानों ने मजलिस मातम और जुलूस निकालकर गम मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह चार बजे नाद ए अली की मस्जिद से अलम और ताबूत के जुलूस के साथ हुई। अंजुमन हैदरी के जेरे इंतेजाम उठाया गया जुलूस दालमंडी, नई सड़क, कालीमहाल, पितरकुंडा होते हुए दरगाह फातमान में समाप्त हुआ।
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बृहस्पतिवार को निकले जुलूस में काले लिबास में मातमदारों के साथ लियाकत अली, शराफत नकवी, प्रिंस हसन, कुनाल खान, लियाकत मिर्जा ने नौहाख्वानी की। वहीं इमानिया कॉलेज में शब्बेदारी का आयोजन हुआ और रात भर या अली की सदाएं बुलंद हुईं और उलेमा ने तकरीर की। हजरत अली समिति के उपाध्यक्ष जहीर हैदर के निवास स्थान पर रोजा इफ्तार का आयोजन हुआ और इसके बाद मजलिस को अयातुल्लाह शमीम हसन ने खिताब किया। इसके अतिरिक्त शहर भर में औरतों की मजलिसें हर घर में हुई और ताबूत उठाए गए। हजरत अली समिति के सचिव फरमान हैदर ने बताया कि इमाम अली का जीवन मानवाधिकार कि मिसाल था। हजरत अली की शहादत के सिलसिले से 23 अप्रैल को शाम चार बजे इमानिया कॉलेज से लाट सरैयां के लिए जुलूस उठाया जाएगा।
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