किसानों पर किया गया लाठी चार्ज।
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किसानों की मांग थी कि उनकी खड़ी फसल को न रौंदा जाए। जमीन की नापी व गेहूं की फसल कटने के बाद ही निर्माण कार्य कराया जाए। किसानों ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी चुनार से लगातार मांग की थी लेकिन प्रशासन ने किसानों की एक भी न सुनी।
रविवार को जैसे ही प्रशासन ने किसानों की खड़ी फसलों को जेसीबी व पोकलैंड से रौंदना शुरू किया। गांव की किसान व महिलाएं जेसीबी व पोकलैंड के सामने आ कर लेट गए। खून पसीने से सींची गई फसलों को बचाने की किसान गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन ने अपनी पर अड़ा रहा।
महिलाओं और पुलिस में नोंकझोंक होने के बाद उपजिलाधिकारी चुनार जंग बहादुर यादव व सीओ चुनार हितेंद्र कृष्ण, थाना प्रभारी निरीक्षक अदलहाट प्रमोद कुमार यादव, थाना जमालपुर, थाना अहरौरा सहित एक प्लाटून पीएसी व भारी संख्या में पुलिस बल व महिला पुलिस किसानों पर टूट पड़ीं। इसमें 35 वर्षीय धर्मेद्र सिंह, 45 वर्षीय राजनाथ, 62 वर्षीय सुक्खी, 60 वर्षीय मुन्नी, 45 वर्षीय पत्ती देवी, 50 वर्षीय बदामी देवी घायल हो गए। जिनको स्थानीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
धर्मेंद्र की हाथ टूटने और गंभीर चोट लगे होने के कारण उसे ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। कई और किसानों को हल्की फुल्की चोटें आईं। किसानों के विरोध के बाद भी फसलों को रौंदते हुए बिना मापी कराए कार्यदायी संस्था का कार्य चलता रहा।
पंचायत में हुआ था फैसला तो फिर क्यों चली फसल पर जेसीबी
कार्यदायी संस्था जमीन का अधिग्रहण करना चाहती थी, पर किसान फसल लगा चुके थे। किसानों ने बताया कि इस मामले को लेकर एसडीएम के साथ पूर्व किसान पंचायत में किसानों की वार्ता कर निर्णय लिया गया था कि फसल कटने और नापी होने के बाद अधिग्रहण किया जाएगा। पंचायत में निर्णय होने के बाद आखिर प्रशासन को क्या जल्दी थी कि आनन-फानन में जेसीबी लेकर किसानों के खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद करने पहुंच गए।