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बीएचयू छात्राओं को मिला प्रियंका गांधी का साथ, दूसरे दिन भी धरना जारी लेकिन नहीं सुन रहा कोई

Sun, 15 Sep 2019 11:53 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रियंका गांधी ने लिखा पोस्ट। - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू में जंतु विज्ञान की छात्राओं पर अश्लील कमेंट करने के आरोप में निलंबित प्रोफेसर को बर्खास्त करने की मांग पर छात्राएं यूनिवर्सिटी के गेट पर शनिवार शाम छह बजे से अड़ी हुई हैं। 24 घंटे बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ये मामला अब गरमाता जा रहा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मामले पर फेसबुक पर पोस्ट कर छात्राओं को समर्थन दिया है।

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प्रियंका गांधी ने लिखा कि बीएचयू में छात्राओं को बार-बार विरोध करने के लिए बाहर निकलना पड़ता है, क्योंकि उनको सुरक्षा की गारंटी मिलती ही नहीं है। एक प्रोफेसर पर कई सारी लड़कियों द्वारा की शिकायत गई और शिकायत समिति द्वारा सही पाई गई, लेकिन कार्यवाही के नाम पर निल बटे सन्नाटा है। साथ ही आगे उन्होंने लिखा कि बेटी बचाओ अभियान अब बेटियां खुद चलाएंगी!

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बीएचयू में जंतु विज्ञान की छात्राओं पर अश्लील कमेंट करने के आरोप में निलंबित प्रोफेसर एसके चौबे को बर्खास्त करने की मांग करते हुए छात्राएं शनिवार शाम छह बजे से सिंह द्वार पर धरने पर बैठी हैं। अभी भी धरना जारी है। नारेबाजी करते हुए छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर प्रोफेसर को बचाने का आरोप लगाया। चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओपी राय ने छात्राओं को मनाने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक वह कुलपति को बुलाने पर अड़ीं थीं।

धरने पर बैठी छात्राओं ने बताया कि पुणे टूर के दौरान प्रोफेसर चौबे ने छात्राओं की शारीरिक बनावट को लेकर अश्लील कमेंट करने के साथ अभद्रता भी की थी। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें बचाने का प्रयास कर रहा है, यह समझ से परे हैं। ऐसा तब हो रहा है जब धरना-प्रदर्शन करने के साथ ही लिखित शिकायत की गई थी।

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अक्तूबर 2018 में जूलॉजी विभाग की छात्राओं को शैक्षणिक टूर पर पुणे ले जाया गया था। टूर से आने के बाद छात्राओं ने प्रोफेसर चौबे पर अश्लील कमेंट का आरोप लगाते हुए शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से थी। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और जांच चलने तक बाहर जाने पर रोक लगाई गई थी। जांच समिति गठित कर 25 अक्तूबर 2018 से 30 नवंबर 2018 तक मामले की जांच कराई गई।
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कमेटी ने छात्राओं के साथ ही विभागीय शिक्षकों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट कुलपति को सौंपी थी। रिपोर्ट में जांच समिति ने छात्राओं के आरोप को सही बताया था। जून 2019 को हुई कार्यपरिषद की बैठक में कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर को चेतावनी दी गई कि भविष्य में वह इस तरह के किसी भी टूर में नहीं जाएंगे। साथ ही भविष्य में उन्हें किसी तरह का कोई पद नहीं दिया जाएगा। 

कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने बताया कि छात्राओं की शिकायत के बाद प्रोफेसर को तुरंत निलंबित कर जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारिणी परिषद ने भी उन पर मेजर पेनाल्टी लगाई है। उनकी सजा माफ नहीं हुई है। उन्हें सभी प्रकार के अधिकारों से डिबार कर दिया गया है। छात्राओं को कार्रवाई के बारे में समझना चाहिए। 
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