अश्लील कमेंट करने वाले प्रोफेसर के खिलाफ धरने पर बैठीं छात्राएं
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अक्तूबर 2018 में जूलॉजी विभाग की छात्राओं को शैक्षणिक टूर पर पुणे ले जाया गया था। टूर से आने के बाद छात्राओं ने प्रोफेसर चौबे पर अश्लील कमेंट का आरोप लगाते हुए शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से थी। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और जांच चलने तक बाहर जाने पर रोक लगाई गई थी। जांच समिति गठित कर 25 अक्तूबर 2018 से 30 नवंबर 2018 तक मामले की जांच कराई गई।
कमेटी ने छात्राओं के साथ ही विभागीय शिक्षकों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट कुलपति को सौंपी थी। रिपोर्ट में जांच समिति ने छात्राओं के आरोप को सही बताया था। जून 2019 को हुई कार्यपरिषद की बैठक में कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर को चेतावनी दी गई कि भविष्य में वह इस तरह के किसी भी टूर में नहीं जाएंगे। साथ ही भविष्य में उन्हें किसी तरह का कोई पद नहीं दिया जाएगा।
छात्राओं की शिकायत के बाद प्रोफेसर को तुरंत निलंबित कर जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारिणी परिषद ने भी उन पर मेजर पेनाल्टी लगाई है। उनकी सजा माफ नहीं हुई है। उन्हें सभी प्रकार के अधिकारों से डिबार कर दिया गया है। छात्राओं को कार्रवाई के बारे में समझना चाहिए। -प्रो. राकेश भटनागर, कुलपति
विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
बीएचयू पीआरओ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति अनुसार, प्रो. शैल कुमार चौबे पर जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सात जून 2019 को हुई कार्यकारिणी परिषद की बैठक में मेजर पेनाल्टी लगाई गई है। उन्हें अपराधी ठहराया गया है। उन्हें भविष्य में विश्वविद्यालय में कोई महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व नहीं दिया जाएगा। न ही वे कभी छात्रों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा कभी किसी अन्य संस्थान में आवेदन भी नहीं कर पाएंगे। यदि वह आवेदन करना भी चाहेंगे तो वह स्वीकार नहीं होगा। उन पर लगाई गई पेनाल्टी उनके सर्विस रिकार्ड में भी डाल दी गई है।