205 लीटर दूध रोजाना, बेकरी-हस्तशिल्प उत्पाद की मांग
सेंट्रल जेल में मौजूदा समय में 77 गोवंश हैं। इनमें से 25 गायें रोजाना 200 लीटर दूध देती हैं। इसके अलावा कैदियों द्वारा तैयार बेकरी उत्पाद को हफ्ते में दो दिन उन्हीं को नाश्ते में दिया जाता है। इसके अलावा जेल की कैंटीन और बाहर के स्टॉल में बेंचने के साथ ही जिला जेल को सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा कैदियों द्वारा तैयार कुर्सी, मेज, टेबल, दरी सहित अन्य सामान की बिक्री अलग-अलग जेलों और अदालतों के साथ ही एनटीपीसी जैसे बड़े संस्थानों को की जाती है।
संगीत से लेकर हुनरमंद बनाने तक का प्रयास
सेंट्रल जेल में इग्नू से संचालित अलग-अलग कोर्स की पढ़ाई के साथ ही 12 कैदी ऐसे हैं, जो प्रयाग संगीत समिति के छात्र भी हैं। इसके अलावा 30-30 कैदियों का बैच बनाकर उन्हें कौशल विकास मिशन योजना के तहत बढ़ई, प्लंबर, बिजली मिस्त्री, वेल्डिंग जैसे काम के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
दस प्रतिशत मुनाफा ऐसे होता है खर्च
सेंट्रल जेल का जो भी उत्पाद बिकता है, उसमें 10 प्रतिशत मुनाफा निर्धारित रहता है। इस 10 प्रतिशत मुनाफे में पांच प्रतिशत कैदियों को बोनस के तौर पर, एक प्रतिशत खेती के लिए, एक प्रतिशत अस्पताल के लिए, एक प्रतिशत बंदी कल्याण कोष के लिए और दो प्रतिशत काम के लिए जरूरी संसाधनों की बढ़ोतरी की मद में खर्च किया जाता है।
आयुर्वेद पर भरोसा बढ़ा, इसलिए की जा रही कवायद
सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद आमजन का भरोसा आयुर्वेद पर पहले की अपेक्षा बढ़ा है। इसलिए यह प्रयास किया जा रहा है कि जेल की खेती योग्य जमीन में गिलोय, अजवाइन, काली मिर्च, हल्दी, गर्म मसालों की पैदावार कैदी करें। इसके लिए प्रयास जारी है और सब कुछ अच्छा रहा तो जल्द ही यह कार्ययोजना मूर्त रूप ले लेगी।