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राजकुमारी चंद्रकांता के अमर प्रेम की गवाह नौगढ़ की वादियां, लोगों की जुबान पर रहते हैं किस्से

Wed, 22 Apr 2020 11:46 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली
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चंद्रकांता किला, बगल से बहती कर्मनाशा नदी - फोटो : अमर उजाला।
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अय्यारों की साजिशों, तिलस्मी अजूबों, खोहों, कंदराओं से भरी रहस्यमय वादियों, युद्धों के बावजूद चंदौली जिले के नौगढ़ की वादियां विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजकुमार विरेंद्र सिंह की अमर प्रेम कथा की गवाह है।

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नौगढ़ की धरती पर आज भी इस प्रेम कहानी के किस्से लोगों की जुबान पर हैं और इस प्रेम कहानी का क्रेज आज भी उतना ही है, जितना प्रसिद्ध साहित्यकार देवकी नंदन खत्री ने अपनी कल्पना शक्ति से चन्द्रकांता नामक उपन्यास की रचना के समय महसूस किया होगा।

चंद्रकांता किला।

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वैसे तो उपन्यासों, कहानियों की रचना का मूल आधार कल्पना शक्ति को ही माना जाता है लेकिन स्थान पात्र, तत्कालीन समाज की स्थिति, राजनीति, खान-पान, वेषभूषा का भी उपन्यासों की रचनाओं में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। इसी कारण चंद्रकांता किरदार गढ़ने में भी नौगढ़, विजयगढ़, चुनारगढ़ के अस्तित्व और सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिवेश का सहारा लेने में रचनाकार ने कोई कोताही नहीं बरती है।

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चंद्रकांता तत्कालीन मिर्जापुर (अब सोनभद्र) के विजयगढ़ के महाराजा जय सिंह और रानी रत्नगर्भा की एकलौती पुत्री थी। जबकि राजकुमार विरेंद्र सिंह तत्कालीन वाराणसी जनपद (अब चन्दौली) के नौगढ़ राज्य के अधिपति सुरेंद्र सिंह के पुत्र थे। बचपन से ही चंद्रकांता और विरेंद्र सिंह के बीच प्रेम की कोपलें फूटी थी। जो समय बीतने के साथ-साथ परवान चढ़ती गई लेकिन दोनों के प्रेम कहानी के बीच तमाम तरह के अवरोध थे।
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